रायगढ़ का एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज बदहाली की कगार पर, 48 महीनों से वेतन नहीं; बंद होने का मंडराया खतरा

रायगढ़। जिले का एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान Kirodimal Institute of Technology (केआईटी) आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। कभी इंजीनियर तैयार करने वाला यह प्रतिष्ठित कॉलेज अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि 120 कमरों की विशाल इमारत में कॉलेज का संचालन अब महज 12 कमरों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि शेष कमरों में अन्य संस्थानों ने कब्जा जमा लिया है।
48 महीनों से वेतन नहीं, 13 करोड़ बकाया
कॉलेज के लगभग 60 कर्मचारी और प्रोफेसर पिछले 48 महीनों से वेतन के इंतजार में हैं। शासन पर उनका करीब 13 करोड़ रुपये वेतन बकाया बताया जा रहा है। आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि कई कर्मचारियों ने घर खर्च चलाने के लिए अपनी पीएफ राशि निकाल ली, जबकि कुछ ने सोना-चांदी और जमा पूंजी तक बेच दी।
लंबे समय से समाधान नहीं मिलने पर अब कर्मचारी न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में हैं।
तीन साल से बंद एडमिशन, सिर्फ 25 छात्र शेष
केआईटी की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों से नए प्रवेश बंद हैं। बिना किसी स्पष्ट आधिकारिक आदेश के संस्थान को लगभग “जीरो ईयर” की स्थिति में पहुंचा दिया गया है।
फिलहाल कॉलेज में केवल फाइनल ईयर के 25 छात्र ही अध्ययनरत हैं। आने वाले कुछ महीनों में इनके कोर्स पूर्ण होते ही संस्थान में छात्रों की संख्या शून्य हो सकती है।
कॉलेज बना दूसरे संस्थानों का ठिकाना
सर्वसुविधायुक्त केआईटी कैंपस अब अन्य संस्थानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। कैंपस में फिलहाल यूनिवर्सिटी उद्यानिकी कॉलेज और नव गुरुकुल संचालित हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जल्द ही नर्सिंग संस्थान और Eklavya Model Residential School के लिए भी यहां कमरे आवंटित किए जा सकते हैं। इससे केआईटी का शैक्षणिक दायरा और सिमटने की आशंका है।
PGIT की उम्मीद भी टूटी
कॉलेज स्टाफ को उम्मीद थी कि संस्थान को अपग्रेड कर पीजीआईटी बनाया जाएगा, जिससे नई जान मिल सकती थी। लेकिन यह अवसर भी केआईटी को न मिलकर दूसरे संस्थान, पॉलिटेक्निक कॉलेज को चला गया।
इस फैसले ने स्टाफ और पूर्व छात्रों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
10 हजार पूर्व छात्रों के रिकॉर्ड पर संकट
यदि कॉलेज बंद होता है तो असर सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा। पिछले 25 वर्षों में 10 हजार से अधिक छात्र यहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और देश-विदेश में कार्यरत हैं।
इन पूर्व छात्रों के मार्कशीट सत्यापन और शैक्षणिक रिकॉर्ड के लिए कॉलेज में नियमित रूप से ईमेल आते हैं। यदि संस्थान बंद हो गया, तो इन हजारों छात्रों के रिकॉर्ड की उपलब्धता और सत्यापन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
सवालों के घेरे में सरकारी उदासीनता
केआईटी की बदहाली अब केवल एक कॉलेज की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह उच्च शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े कर रही है। कर्मचारियों और छात्रों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस संस्थान को बचाने के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाती है।







