पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत का बड़ा कदम, गैस सप्लाई सुरक्षा के लिए नया आदेश लागू

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए ऊर्जा सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026’ लागू किया है, जिसका उद्देश्य देश में आवश्यक क्षेत्रों को गैस की कमी से बचाना है।
इस आदेश का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपयोग, परिवहन और कृषि से जुड़े क्षेत्र प्रभावित न हों। इसके तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG और LPG उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
भारत की गैस सप्लाई पर वैश्विक निर्भरता
भारत की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आपूर्ति का बड़ा हिस्सा विभिन्न देशों से आता है, जिनमें कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, रूस, ओमान, UAE, नाइजीरिया और अंगोला प्रमुख हैं। कतर भारत का सबसे बड़ा सप्लायर माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की LNG और LPG आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से गुजरता है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील रास्ता है। इसी वजह से यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
किन क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता
नए आदेश के तहत घरेलू PNG, CNG और LPG उत्पादन को पिछले छह महीनों के औसत के आधार पर 100% आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई है। वहीं, उर्वरक (फर्टिलाइजर) संयंत्रों को लगभग 70% गैस आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी, ताकि कृषि उत्पादन पर असर न पड़े।
नौसेना और सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय
स्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। गैस और LPG टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। हाल ही में कई टैंकर सुरक्षित भारत पहुंचे हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में LPG शामिल थी।
आयात विविधीकरण की कोशिश
भारत अब अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने के लिए अमेरिका, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयात बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर सप्लाई बाधित न हो।
कुल मिलाकर, यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आम लोगों पर संभावित संकट का असर कम करने के लिए उठाया गया है।








