उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का दावा: 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त

सशस्त्र नक्सलवाद पर नियंत्रण सिर्फ प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक पुनर्जागरण का संकेत
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ आगामी 31 मार्च तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि बस्तर और पूरे प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक पुनर्जागरण की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव बताया।
रणनीति और आत्मसमर्पण से मिली सफलता
उपमुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में बताया कि केंद्र द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप राज्य में सुनियोजित रणनीति लागू की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। हाल ही में डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि नक्सली संगठन का शीर्ष ढांचा कमजोर हो चुका है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2 हजार से ज्यादा गिरफ्तार हुए और करीब 500 मुठभेड़ों में निष्प्रभावी किए गए। वर्तमान में केवल 30-40 नक्सली दूरस्थ क्षेत्रों में सक्रिय बचे हैं।
बस्तर और अन्य जिले नक्सल मुक्त
श्री शर्मा ने बताया कि बस्तर सहित कबीरधाम, राजनांदगांव, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं। बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत क्षेत्र सुरक्षित है। इस सफलता का श्रेय उन्होंने सुरक्षा बलों की रणनीति, साहस और स्थानीय समुदाय के सहयोग को दिया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और मुरिया, मारिया, गोंड व हलबा समाज के सहयोग से विश्वास और संवाद का वातावरण बना, जिससे बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा।
बस्तर का समग्र विकास अब मुख्य उद्देश्य
सरकार अब बस्तर के समग्र विकास पर जोर दे रही है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों से युवाओं को नई दिशा मिल रही है। लगभग 400 सुरक्षा कैंपों को विकास केंद्रों में बदलकर वहां स्कूल, अस्पताल और रोजगार से जुड़े संसाधन विकसित किए जाएंगे।
तकनीकी सहयोग और भविष्य की योजना
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लाल आतंक से मुक्ति’ के संकल्प, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की समय-सीमा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यह अभियान सफल हो रहा है। इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं का तकनीकी सहयोग भी इसमें महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सुशासन का आदर्श मॉडल बनेगा, और बस्तर क्षेत्र नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ेगा।






