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15 साल से जलकर बकाया: आरकेएम पावरजेन पर 413 करोड़ रुपये का बकाया, विभाग ने भेजा नोटिस

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रायगढ़। जिले में उद्योगों द्वारा जल उपयोग और जलकर भुगतान को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि RKM Powergen ने पिछले 15 वर्षों से जलकर का पूरा भुगतान नहीं किया है। बकाया राशि अब बढ़कर 413.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जल संसाधन विभाग ने कंपनी को बकाया राशि जमा करने का नोटिस जारी करते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।


बैराज से पानी, लेकिन टैक्स भुगतान अधूरा

स्टील और पावर प्लांटों को भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। नियमों के अनुसार इन्हें भूजल दोहन की अनुमति नहीं होती, इसलिए नदियों पर बैराज और डैम बनाकर पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए उद्योगों और जल संसाधन विभाग के बीच अनुबंध होता है, जिसमें जल उपयोग शुल्क तय रहता है।

जानकारी के अनुसार, उच्चपिंडा-डभरा स्थित आरकेएम पावरजेन के 360 मेगावाट यूनिट को साराडीह बैराज से पानी आपूर्ति की जाती है। 4 दिसंबर 2015 को हुए अनुबंध के तहत कंपनी को प्रतिवर्ष 11.20 मिलियन घन मीटर पानी दिया जाना था।


कई मदों में बढ़ता गया बकाया

विभागीय आंकड़ों के अनुसार कंपनी पर कई मदों में भारी बकाया है, जिसमें बैराज निर्माण की दूसरी किश्त, पेनाल्टी, ब्याज, भू-अर्जन राशि और जलकर शामिल हैं। प्रमुख बकाया इस प्रकार हैं:

  • बैराज निर्माण दूसरी किश्त — 44.80 करोड़ रु.
  • विलंब भुगतान पेनाल्टी — 89 लाख रु.
  • ब्याज (RBI व्यावसायिक ऋण दर 9%) — 58.73 करोड़ रु.
  • भू-अर्जन आनुपातिक राशि — 43.28 करोड़ रु.
  • सितंबर 2023 से मई 2025 तक जलकर — 118.67 करोड़ रु.
  • पुरानी व वर्तमान देयक अंतर राशि — 146.67 करोड़ रु.

कुल बकाया राशि 413.06 करोड़ रुपये बताई गई है।


अनधिकृत जल उपयोग पर दर तीन गुना बढ़ी

जल संसाधन विभाग ने फरवरी 2026 में कंपनी द्वारा कथित अप्राधिकृत जल उपयोग पाए जाने पर जलकर दर बढ़ाकर तीन गुना कर दी। नई दर 45 रुपये प्रति एमसीएम निर्धारित की गई। फरवरी से मई 2026 तक चार महीनों का बिल इसी नई दर पर भेजा गया, लेकिन आरोप है कि कंपनी अभी भी पुरानी दर पर ही भुगतान कर रही है।


विभाग की सख्त चेतावनी

Kelo Pariyojana Bandh Mandal के अधीक्षण अभियंता ने कंपनी को जल्द बकाया जमा करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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