भारतीय सेना की एयर डिफेंस क्षमता में बड़ा सुधार

30 लो-लेवल लाइटवेट रडार और 2 क्लासरूम वेरिएंट रडार की खरीद के लिए RFP जारी
नई दिल्ली। भारतीय सेना अपनी एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। रक्षा मंत्रालय ने 30 इम्प्रूव्ड लो-लेवल लाइटवेट रडार (LLLR-I) और 2 क्लासरूम वेरिएंट रडार की खरीद के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इन रडारों की अनुमानित लागत लगभग 725 करोड़ रुपये है।
रडारों की खरीद अगले तीन महीनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। ये रडार पहाड़ी इलाकों, ऊंचाई वाले क्षेत्र, मैदान, अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।
उन्नत तकनीक और आर्मी डेटा नेटवर्क से कनेक्टिविटी
रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, ये रडार आकाशतीर कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम से जुड़ी होंगी। इसके लिए आवश्यक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पहले से ही सिस्टम में शामिल होंगे।
- रडार को आर्मी डेटा नेटवर्क से जोड़ने के लिए साइबर सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा।
- इसे दुश्मन के विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसी हवाई गतिविधियों की पहचान, ट्रैक और प्राथमिकता तय करने में सक्षम बनाया जाएगा।
- रडार एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखेगा।
स्वदेशी तकनीक और तेज प्रतिक्रिया क्षमता
रडार के डिजाइन में 50-70 प्रतिशत मेक-इन-इंडिया उपकरण शामिल किए जाएंगे।
- खतरे का पता लगते ही रडार चंद सेकंड में 10 कमांड पोस्ट या 10 हथियार प्रणालियों को संदेश भेज सकेगा।
- निगरानी रेंज लगभग 20 किलोमीटर तक होगी।
- कम्युनिकेशन लाइन, रेडियो और रेडियो रिले के माध्यम से डेटा साझा किया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर इसे 20 टारगेट डेटा रिसीवर तक बढ़ाया जा सकेगा।
सेना और सुरक्षा विशेषज्ञों का मत
कर्नल उमंग कोहली के अनुसार, इन रडारों के शामिल होने से एयर डिफेंस निगरानी क्षमता में बड़ा सुधार होगा और देश की सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी।
रडारों की यह नई प्रणाली भारतीय सेना को दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर तेज़ और प्रभावी नियंत्रण रखने में सक्षम बनाएगी।












