राजिम कुंभ कल्प 2026: राजपत्र से नाम हटाए जाने पर रायपुर संत समाज नाराज, बहिष्कार का ऐलान

रायपुर । राजिम कुंभ कल्प 2026 की तैयारियों के बीच राजधानी रायपुर के संत समाज में असंतोष उभरकर सामने आया है। मंगलवार को सुरेश्वर महादेव पीठ में आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रकाशित राजपत्र में रायपुर के कई प्रतिष्ठित संतों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसे संत समाज ने अपमानजनक बताते हुए राजिम कुंभ कल्प में भाग न लेने का निर्णय लिया है।
किन संतों के नाम हटाने का आरोप
संतों के अनुसार राजपत्र से जिन संतों के नाम हटाए गए हैं, उनमें प्राचीन मठ के महंत देवदास महाराज, महंत वेद प्रकाश, गोंडवाना समाज से जुड़े संत निराहारी महाराज, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या मां सहित अन्य संत शामिल हैं।
संतों का कहना है कि इससे पहले जारी राजपत्र में भी केवल छह संतों के नाम शामिल किए गए थे। इस संबंध में मुख्यमंत्री और धर्मस्व मंत्री को मौखिक रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
संत समाज ने सवाल उठाया कि आखिर कौन व्यक्ति या प्रभावशाली तत्व संतों के नाम सूची में जोड़ने और हटाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध बताते हुए ऐसे तत्वों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
संतों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजिम कुंभ कल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है, लेकिन इस प्रकार की गतिविधियां कुंभ की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
⚠️ मेला प्रभारी पर अभद्र व्यवहार का आरोप
प्रेस वार्ता में संतों ने मेला प्रभारी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि संत वेद प्रकाश से बातचीत के दौरान जिस भाषा और लहजे का इस्तेमाल किया गया, वह असम्मानजनक था। संतों के अनुसार अब तक न तो माफी मांगी गई और न ही संतों को सम्मान दिया गया।
संतों का कहना है कि वे कल्प कुंभ में शामिल होने के लिए तैयार थे, लेकिन राजपत्र की सूची से नाम हटने के बाद बहिष्कार का निर्णय लिया गया।
📜 डॉ. स्वामी राजेश्वरानंद ने दिया त्यागपत्र
इस अवसर पर डॉ. स्वामी राजेश्वरानंद ने बताया कि पिछले वर्ष संतों ने बिना सूचीबद्ध हुए भी कुंभ में सक्रिय सहभागिता निभाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी संबंधित अधिकारी द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया था।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष राजपत्र में उन्हें सचिव का दायित्व सौंपा गया, लेकिन उन्हें किसी बैठक या आधिकारिक सूचना में शामिल नहीं किया गया। इन परिस्थितियों में उन्होंने संत समाज के समर्थन में स्वेच्छा से त्यागपत्र देने की घोषणा की।
🛑 संत समाज की चेतावनी
संत समाज ने दो टूक कहा कि उन्हें न तो किसी पद की आकांक्षा है और न ही नाम की। वे धर्म और समाज सेवा के कार्य में निरंतर लगे रहेंगे, लेकिन संतों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रेस वार्ता में आचार्य रुपेश जी महाराज (प्रवक्ता, संत महासभा छत्तीसगढ़), आचार्य रविंद्र शास्त्री, आचार्य लक्ष्मीकांत, श्रीमद्भागवत आचार्य दिलेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में साधु-संत उपस्थित रहे।












