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सऊदी अरब पर ईरान के हमलों के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख और सऊदी रक्षा मंत्री की रणनीतिक बैठक

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रियाद में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ईरान के हालिया हमलों और रोकथाम के उपायों पर चर्चा

सऊदी अरब, 7 मार्च 2026 – अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी क्षेत्र के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर हाल के दिनों में लगातार हमले हुए हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के बीच अहम बैठक हुई।

बैठक में ईरान के हालिया हमलों और उन्हें रोकने के रणनीतिक उपायों पर चर्चा हुई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई और दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।

सऊदी अरब के ऑयल फील्ड और एयर बेस पर हमले

हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब के शायबा ऑयल फील्ड को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, छह ड्रोन को मार गिराया गया, जबकि दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट की गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे इसमें शामिल हो रहा है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम

ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण बन गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा किया कि हाल के सऊदी अरब पर हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने के पीछे पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीतिक पहल रही।

इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रणनीतिक रक्षा समझौता है। तनाव बढ़ने पर पाकिस्तान ने तुरंत ईरान से संपर्क किया और आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का उपयोग ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। इस पहल ने तत्काल टकराव को टालने में मदद की।

क्या बढ़ सकता है पश्चिम एशिया में जंग?

अब तक खाड़ी देश सीधे टकराव से दूर रहे और अमेरिका ने भी अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं किया। हालांकि, यदि ईरान द्वारा हमले जारी रहते हैं और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।

किसी भी सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान शामिल होता है, तो संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण एशिया तक फैलने का जोखिम भी होगा, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान की लंबी सीमा है।

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