रामअवतार जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी दोषी करार, हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

23 साल पुराने केस में बड़ा फैसला, CBI की अपील मंजूर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
CBI की अपील को मिली मंजूरी, याचिका खारिज
हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। वहीं शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अन्य आरोपियों की सजा पहले ही बरकरार रखी जा चुकी है, ऐसे में अलग से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
तीन हफ्ते में सरेंडर का आदेश
अदालत ने स्पष्ट किया कि अमित जोगी फिलहाल जमानत पर हैं, लेकिन यह राहत केवल तीन सप्ताह तक ही मान्य रहेगी। इस अवधि के भीतर उन्हें ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा, अन्यथा पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजेगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सबूतों पर दिया जोर
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ समान साक्ष्य मौजूद हों, तो किसी एक को राहत देना न्यायसंगत नहीं है। बिना ठोस आधार के किसी आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बदली केस की दिशा
इससे पहले हाई कोर्ट ने CBI और सतीश जग्गी की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां देरी को माफ करते हुए केस को दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेजा गया था।
2003 में हुई थी हत्या, लंबे समय से चल रहा था मामला
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे।
राजनीतिक गलियारों में फिर हलचल
इस फैसले के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में रहा है और अब आए इस फैसले ने नई बहस छेड़ दी है।






