
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में एक बार फिर हाथी शावक की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छाल वन परिक्षेत्र के आमागुड़ा-पुसल्दा तालाब में एक करीब दो वर्षीय हाथी शावक दलदल में फंस गया, जिससे उसकी मौत हो गई। बीते 17 दिनों में यह तीसरा और लगभग एक महीने में चौथा मामला सामने आया है।
रात में झुंड के साथ तालाब पहुंचा था शावक
जानकारी के मुताबिक, छाल रेंज के एडू परिसर में इन दिनों 52 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। 23 मई को रात में यह दल जंगल से निकलकर आमागुड़ा-पुसल्दा तालाब के पास पहुंचा था। माना जा रहा है कि हाथी पानी पीने और नहाने के लिए तालाब में उतरे थे, तभी एक शावक दलदली हिस्से में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। काफी प्रयास के बाद भी वह खुद को बचा नहीं पाया और उसकी मौत हो गई।
मां का ममता भरा प्रयास देख भावुक हुए ग्रामीण
सुबह जब ग्रामीणों और हाथी ट्रैकर्स को घटना की जानकारी मिली तो इलाके में मार्मिक दृश्य देखने को मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक मादा हाथी काफी देर तक मृत शावक को अपने पैरों और सूंड से उठाने की कोशिश करती रही। हाथियों का झुंड भी लंबे समय तक शावक के आसपास खड़ा रहा और चिंघाड़ता रहा।

हाथियों की मौजूदगी से बचाव कार्य में आई दिक्कत
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आसपास हाथियों का दल मौजूद होने के कारण तत्काल कार्रवाई करना जोखिम भरा था। कुछ देर बाद जब हाथियों का झुंड जंगल की ओर बढ़ा, तब विभागीय अमले ने शावक के शव को दलदल से बाहर निकाला।
17 दिनों में तीन शावकों की मौत
धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार हो रही हाथी शावकों की मौत चिंता का विषय बनती जा रही है। 8 मई को छाल रेंज के सिंघीझाप क्षेत्र स्थित घोघरा डैम में पानी में डूबने से लगभग छह माह के शावक की मौत हुई थी। 11 मई को तरकेला गांव के केराझरिया जंगल में दलदल में फंसने से एक अन्य शावक ने दम तोड़ दिया। अब आमागुड़ा-पुसल्दा तालाब में तीसरे शावक की मौत सामने आई है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों खर्च, फिर भी सुरक्षा इंतजाम कमजोर
प्रदेश सरकार हाथियों की सुरक्षा, निगरानी और मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। जंगलों में कैंप, ट्रैकिंग टीम और मॉनिटरिंग सिस्टम के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग नजर आ रहे हैं। लगातार हो रही मौतों से यह सवाल उठने लगा है कि आखिर सुरक्षा योजनाएं कितनी प्रभावी हैं।
ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीण ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से हाथियों का बड़ा दल घूम रहा था, इसके बाद भी दलदली और जोखिम वाले इलाकों की निगरानी नहीं की गई। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और बचाव के इंतजाम किए जाते तो शावक की जान बचाई जा सकती थी।
वन विभाग ने क्या कहा
छाल रेंजर राजेश चौहान ने बताया कि क्षेत्र में 52 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। रात में तालाब में उतरने के दौरान शावक दलदल में फंस गया। हाथियों के हटने के बाद शव को बाहर निकालकर आगे की कार्रवाई की गई है। वन विभाग मामले की जांच कर रहा है






