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छत्तीसगढ़ के पांच नए मेडिकल कॉलेजों में 175 डॉक्टरों की कमी के कारण उनकी मान्यता खतरे में है। वॉक-इन-इंटरव्यू में केवल नौ डॉक्टर पहुंचे, जिससे सरकारी सेवा में डॉक्टरों की घटती रुचि उजागर हुई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा, कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा और जशपुर में इस वर्ष शुरू होने वाले पांच नए मेडिकल कॉलेजों की मान्यता फैकल्टी की कमी के कारण संकट में है।
इन कॉलेजों में 175 डॉक्टरों की संविदा पर भर्ती के लिए 15 और 16 मई को रायपुर मेडिकल कॉलेज में वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किया गया था। इस साक्षात्कार में केवल नौ डाक्टर ही उपस्थित हुए, जिनमें से आठ की नियुक्ति की गई है।
सरकारी चिकित्सा सेवा में डॉक्टरों की रुचि कम
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने कहा कि सरकारी चिकित्सा सेवा में डॉक्टरों की रुचि तेजी से कम हो रही है। साक्षात्कार के लिए सिर्फ नौ डॉक्टरों का उपस्थित होना चिंताजनक है।
वहीं डीएमई डा. यूएस पैकरा ने कहा कि नए मेडिकल कालेजों को इसी सत्र से संचालित करने प्रयास किया जा रहा है। वॉक इन इंटरव्यू हुआ था, आगे भी प्रक्रिया जारी रहेगी। प्रमोशन के लिए भी प्रक्रिया चल रही है।
बता दें कि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नए मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए छह मई से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी, जिसकी अंतिम तिथि 13 मई थी। डॉक्टरों के लिए वेतनमान एक लाख से सवा दो लाख रुपये तक निर्धारित किया गया था।
इस बीच रायपुर मेडिकल कालेज के चार डॉक्टरों ने प्रमोशन और वेतन विसंगति के कारण इस्तीफा दिया है। इनमें से एक डॉक्टर ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ली है।
प्रदेश के 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं, फिर भी पदोन्नति की प्रक्रिया ठप है। 296 डॉक्टर पिछले दो वर्षों से प्रमोशन के लिए प्रतीक्षारत हैं।
बता दें कि चिकित्सा विभाग ने पांच मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को प्रस्ताव भेजा है। नए कॉलेजों में एमबीबीएस की 50-50 सीटें होंगी। वर्तमान में प्रदेश में 10 शासकीय और चार निजी मेडिकल कालेज संचालित हैं।
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