छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सियासत में गर्मी: सस्पेंडेड CEO ने बताया कार्रवाई को गलत, पूर्व CM भूपेश बघेल से मिले

Advertisement
Advertisement
बीजेपी कार्यकर्ता से बदसलूकी के मामले को लेकर CEO रूपेश कुमार पाण्डेय को निलंबित कर दिया गया है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल से मुलाक़ात कर उन्होंने कार्रवाई को गलत बताया। 
 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जन समस्या निवारण शिविर के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता से बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद CEO रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में अब सियासत भी तेज हो गई है। CEO रूपेश कुमार पाण्डेय सोमवार को पूर्व सीएम भूपेश बघेल से मुलाक़ात करने पहुंचे। उन्होंने निलंबन को गलत बताते हुए कहा मुझे पर जो कार्रवाई हुई है वह गलत है और इस मामले को लेकर मैं चीफ सेक्रेटरी के पास जाऊंगा।

दरसअल, ग्राम थनौद में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर के दौरान जनपद पंचायत दुर्ग के CEO रूपेश कुमार पाण्डेय का कथित अभद्र व्यवहार अब उनके निलंबन की वजह बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। मामला सीधे संभाग आयुक्त तक पहुंचा। जांच हुई और कार्रवाई भी।

अधिकारी ने लोगों से किया अमर्यादित व्यवहार 
बताया गया कि शिविर के दौरान आम लोगों से बातचीत करते समय अधिकारी का व्यवहार मर्यादित नहीं था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी। सरकारी कार्यक्रम में जनता से अभद्रता का आरोप लगने के बाद प्रशासन के लिए चुप रहना मुश्किल हो गया। वीडियो ने पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला भी शुरू हुआ।

वीडियो क्लिप का किया गया परीक्षण 
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर ने रिपोर्ट भेजी। वीडियो क्लिप का भी परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में अधिकारी के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। आयुक्त कार्यालय ने माना कि शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही हुई है। साथ ही आम नागरिकों के प्रति अशिष्ट व्यवहार भी सामने आया है। यही आधार निलंबन कार्रवाई का कारण बना।

नोटिस का नहीं दिया संतोषजनक जवाब 
30 मई 2026 को रूपेश कुमार पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया। अधिकारी ने जवाब प्रस्तुत किया। लेकिन आयुक्त कार्यालय को वह संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। महज दो दिन के भीतर निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

इन नियमों के तहत किया गया सस्पेंड 
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि शासकीय सेवकों को सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ और जनता के प्रति शिष्ट होना चाहिए। यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों में तय की गई है। यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी इन मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी वजह से उनके खिलाफ कदाचार और लापरवाही का मामला माना गया। संभाग आयुक्त ने नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button