छत्तीसगढ़

पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत छत्तीसगढ़ में ईवी चार्जिंग नेटवर्क विस्तार की तैयारी, जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू

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छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का नेटवर्क विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में इलेक्ट्रक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधाओं का नेटवर्क विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं से ऐसे उपयुक्त स्थलों की जानकारी मांगी है, जहां इलेट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन या चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जा सकें। यह पहल केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत की जा रही है।

इस ई-ड्राइव योजना के तहत की जा रही है। इस योजना के लिए 70 से 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का अनुमान है कि नगर निगम क्षेत्रों में दोपहिया और चार पहिया इलेट्रिक वाहनों के लिए लगभग 25 से 30 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय निकायों को संभावित स्थलों का चिन्हांकन कर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों बढ़ रही है चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत
देशभर में इलेट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रोत्साहन योजनाएं चला रही हैं। हालांकि, इलेक्ट्रक वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता रही है। जानकारों का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार हुए बिना इलेट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाना मुश्किल होगा। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना शुरू की है, जिसके तहत सार्वजनिक चार्जिंग अवसंरचना के विकास पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

किन स्थानों को मिलेगी प्राथमिकता
विभागीय निर्देशों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन ऐसे स्थानों पर स्थापित किए जाने हैं जहां वाहन खड़े करने की पर्याप्त क्षमता हो और आम लोगों की पहुंच आसान हो। पार्किंग स्थल, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र, अस्पताल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। साथ ही सरकारी या नगर निगम स्वामित्व वाली भूमि को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। स्थल चयन के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वहां बिजली कनेक्शन उपलब्ध हो या निकट भविष्य में आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। प्रत्येक प्रस्तावित स्थल का अक्षांश-देशांतर और कम से कम दो फोटोग्राफ भी भेजने होंगे।

चार्जिंग स्टेशन के लिए क्या होंगे मानक ?

दस्तावेज के अनुसार प्रत्येक चार्जिंग स्टेशन के लिए लगभग 800 वर्गफुट भूमि उपलब्ध होना आवश्यक होगा। इसके अलावा प्रत्येक स्टेशन की न्यूनतम कुल क्षमता 144 किलोवाट रखने का प्रस्ताव है, ताकि एक साथ कई वाहनों को चार्ज किया जा सके। स्थल चयन से पहले उसकी व्यवहार्यता (फिजिबीलिटी) और उपयोगिता का परीक्षण भी किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक निवेश का अधिकतम लाम मिल सके।

केंद्र सरकार देगी भारी अनुदान
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वित्तीय सहायता है। विभागीय पत्र के अनुसार ‘बी’ श्रेणी के नगर निगम क्षेत्रों में स्थापित होने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए विद्युत अधोसंरचना (अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर) की लागत का 80 प्रतिशत और चार्जिंग मशीनों एवं उपकरणों की लागत का 70 प्रतिशत तक अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाना प्रस्तावित है। शेष राशि की व्यवस्था संबंधित नगर निगमों को करनी होगी। इसके लिए उन्हें जिला कलेक्टरों के साथ समन्वय स्थापित कर उपलब्ध वित्तीय स्रोतों से आवश्यक धन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या मायने
छत्तीसगढ़ में अभी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार शुरुआती विस्तार के दौर में है, लेकिन रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा जैसे शहरों में ई-स्कूटर और ई-कारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क विकसित होने से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में लोगों का भरोसा बढ़ सकता है। सरकार के इस कदम को राज्य में हरित परिवहन को बढ़ावा देने, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। फिलहाल नगर निगमों और नगर पालिकाओं से उपयुक्त स्थलों की पहचान कर प्रस्ताव भेजने को कहा गया है, जिसके बाद योजना के क्रियान्वयन की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

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