13 घंटे की जंग जीतकर लौटी जिंदगी, एम्स रायपुर ने बचाई युवक की जान

रायपुर। AIIMS Raipur के हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सा विभाग ने एक बेहद जटिल और जानलेवा हृदय रोग से पीड़ित 38 वर्षीय युवक का सफल उपचार कर बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। Chhattisgarh के Surguja निवासी मरीज एक्यूट स्टैनफोर्ड टाइप-ए एओर्टिक डिसेक्शन जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहा था, जिसे चिकित्सा जगत में सबसे खतरनाक हार्ट इमरजेंसी में गिना जाता है।
90 मिनट में लिया बड़ा फैसला, तुरंत शुरू हुआ इलाज
मरीज गंभीर सीने के दर्द और अन्य लक्षणों के साथ AIIMS Raipur पहुंचा। जांच के दौरान डॉक्टरों को गंभीर बीमारी की आशंका हुई। तत्काल सीटी एओर्टोग्राम कराया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि मरीज की मुख्य रक्त वाहिका एओर्टा की भीतरी परत फट चुकी है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें समय पर इलाज न मिले तो कुछ ही घंटों में जान जा सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी, सीटीवीएस, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, आईसीयू और नर्सिंग टीम ने तेजी से समन्वय किया। निदान की पुष्टि के मात्र 90 मिनट के भीतर मरीज को ऑपरेशन थिएटर पहुंचा दिया गया।
13 घंटे चली जटिल सर्जरी
रातभर चली करीब 13 घंटे की हाई-रिस्क सर्जरी में क्षतिग्रस्त एओर्टा को कृत्रिम ग्राफ्ट से बदला गया और एओर्टिक वाल्व का सफल प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन विशेषज्ञ टीम ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
6 दिन ICU निगरानी, फिर मिली छुट्टी
सर्जरी के बाद मरीज की हालत लगातार सुधरती गई। ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर वेंटिलेटर हटाया गया। छह दिनों तक कार्डियक ICU में निगरानी के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया। अंततः ऑपरेशन के 10वें दिन मरीज को स्वस्थ और स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टर बोले— समय पर पहचान ही बनी जीवनरक्षक
विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी में इलाज में हर घंटे की देरी से मृत्यु का खतरा 1-2 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर पहचान, तेज निर्णय और विभिन्न विभागों के उत्कृष्ट समन्वय के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी।
AIIMS Raipur प्रबंधन ने इसे संस्थान की उन्नत हृदय शल्य चिकित्सा क्षमता का प्रमाण बताया और कहा कि अब छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों के मरीजों को भी विश्वस्तरीय हार्ट केयर उपलब्ध कराया जा रहा है।







