ITR Filing Deadline: इन टैक्सपेयर्स के लिए 31 अक्टूबर तक ITR भरने का मौका

वेतनभोगी और पेंशनर्स के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बीती, ऑडिट वाले कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को मिली 31 अक्टूबर तक की मोहलत
नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करने की समय-सीमा सभी टैक्सपेयर्स के लिए एक जैसी नहीं होती। अलग-अलग आय वर्ग और टैक्स ऑडिट की जरूरत के आधार पर रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख निर्धारित की जाती है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अधिकांश वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनर्स और ऐसे अन्य करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की सामान्य समय-सीमा 31 जुलाई 2026 थी।
वहीं, जिन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के खातों पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं होता, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 थी। अब टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए ITR दाखिल करने की अगली अहम समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 है।
किन कारोबारियों को 31 अक्टूबर तक भरना है ITR
जिन कारोबारियों के खातों का इनकम टैक्स कानून की धारा 44AB के तहत टैक्स ऑडिट कराया जाना जरूरी है, उन्हें 31 अक्टूबर 2026 तक अपना ITR दाखिल करना होगा। ऐसे मामलों में कारोबार की प्रकृति और निर्धारित सीमा के आधार पर ऑडिट की आवश्यकता तय होती है।
टैक्स ऑडिट वाले प्रोफेशनल्स भी दायरे में
ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी सकल प्राप्तियां या आय निर्धारित टैक्स ऑडिट सीमा के अंतर्गत आती है, उनके लिए भी 31 अक्टूबर की समय-सीमा लागू हो सकती है। इसलिए संबंधित करदाताओं को अपने आय और ऑडिट से जुड़े दस्तावेज समय पर तैयार रखने की जरूरत है।
ऑडिट वाली फर्म के कुछ पार्टनर्स भी शामिल
टैक्स ऑडिट वाली फर्म में शामिल कुछ पार्टनर्स के लिए भी 31 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा लागू हो सकती है। इसके अलावा ऐसे अन्य करदाता, जिनके खातों का इनकम टैक्स कानून की किसी अन्य लागू धारा के तहत ऑडिट आवश्यक है, वे भी इसी डेडलाइन के दायरे में आ सकते हैं।
टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी सलाह
ITR दाखिल करने से पहले करदाताओं को अपनी आय, निवेश, बैंक खातों और टैक्स से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी सही तरीके से मिलान कर लेनी चाहिए। खासतौर पर ऑडिट वाले कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ जरूरी ऑडिट और रिटर्न संबंधी प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए, ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी न हो।
इस तरह 31 अक्टूबर 2026 की तारीख मुख्य रूप से उन कारोबारियों, प्रोफेशनल्स और अन्य करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कानून के तहत आवश्यक है।






