मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा पंडालों में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा महोत्सवों और दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मां आदिशक्ति की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
नवरात्रि आस्था, संस्कृति और मातृशक्ति के सम्मान का पर्व : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का महापर्व है। यह पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। गरबा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजन आस्था एवं परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के सूत्र में बांधते हैं।
दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर लिया मां का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माना बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति तथा सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां के चरणों में शीश नवाकर प्रदेशवासियों के कल्याण और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति की कामना की।
कई गरबा महोत्सवों में हुए शामिल
दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि आयोजनों में शामिल हुए। इनमें हुकुम ललित महल में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत युवा विंग द्वारा आयोजित ‘रास गरबा विथ भजन डांडिया’, रामबाग में आयोजित रास गरबा, पचपेड़ी नाका स्थित राम मंगलम लॉन में श्री दशा सोरठिया वाणिक समाज का ‘सोरठी रंग रंगीलो’ नवरात्रि उत्सव तथा शंकर नगर के बीटीआई मैदान में आयोजित ‘संकल्प गरबा’ शामिल रहे।
विभिन्न आयोजनों में समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। गरबा महोत्सवों में भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल देखने को मिला।
विविधता में एकता का प्रतीक हैं हमारे पर्व
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे देश और छत्तीसगढ़ में भक्ति, आस्था और उल्लास का वातावरण है। गरबा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का सुंदर माध्यम है। गुजरात की सांस्कृतिक परंपरा से निकला गरबा आज पूरे देश में लोकप्रिय हो चुका है और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता विविधता में एकता है। हमारे पर्व और उत्सव अलग-अलग समाजों, समुदायों और पीढ़ियों को एक साथ जोड़ते हैं। ये आयोजन हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के साथ आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं।






