रायगढ़ के गोपीनाथजीव मंदिर में वार्षिक उत्सव: संत बाबा प्रियदर्शी राम जी ने दिया आध्यात्मिक संदेश

रायगढ़। कोष्टापारा स्थित श्री गोपीनाथजीव मंदिर में आयोजित 16वें वार्षिक उत्सव महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को परमपूज्य अघोरेश्वर संत बाबा प्रियदर्शी राम जी ने आध्यात्मिक आशीर्वचन दिए।
“सुख भीतर है, बाहर नहीं” – बाबा जी का संदेश
शाम 5 बजे प्रवचन के दौरान बाबा प्रियदर्शी राम जी ने कहा कि मनुष्य बाहरी साधनों में सुख खोजता है, जबकि वास्तविक सुख उसके भीतर ही मौजूद है। इसे समझने और महसूस करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गीता और रामायण का नियमित पाठ जीवन को सत्य और धर्म के मार्ग पर ले जाता है।
रामायण से दिया जीवन का उदाहरण
बाबा जी ने प्रभु श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि अगले दिन राजतिलक होने के बावजूद उन्होंने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया, जो त्याग और मर्यादा का अद्भुत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि संतों द्वारा बताए गए मार्ग का पालन न करने से ही जीवन में दुख उत्पन्न होते हैं।
“गीता और रामायण जीवन के मार्गदर्शक ग्रंथ”
बाबा प्रियदर्शी राम जी ने कहा कि भगवद्गीता और रामायण आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन समय में थीं। ये दोनों ग्रंथ जीवन को सही दिशा देने वाले हैं, लेकिन लोग इनके अध्ययन से दूर होते जा रहे हैं, जिससे जीवन में अशांति बढ़ रही है।
युवाओं के लिए विशेष संदेश
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोबाइल और टीवी पर अधिक समय बिताने से मन चंचल हो रहा है और एकाग्रता प्रभावित हो रही है।
बाबा जी ने अपील की कि हर परिवार को प्रतिदिन कम से कम पाँच श्लोक गीता और रामायण से पढ़ने चाहिए। इससे संस्कार, भक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास होगा।
“गीता का एक श्लोक भी जीवन बदल सकता है”
बाबा जी ने कहा कि यदि मनुष्य अनुशासित जीवन जीते हुए सत्कर्म करे, तो वह जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्त हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्य, सकारात्मकता और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का आह्वान किया।








