Chhattisgarh Udyog Sthal Chayan Niyam : छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए नए सख्त नियम, लाल श्रेणी के भारी उद्योग जंगल, आबादी, स्कूल और हेरिटेज साइट से 500 मीटर दूर लगेंगे

पर्यावरण मंडल ने जारी किए नए स्थल चयन मानदंड, नारंगी श्रेणी के लिए 200 और हरी श्रेणी के लिए 100 मीटर की दूरी तय
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और आम लोगों के जनजीवन की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने उद्योगों और परियोजनाओं की स्थापना के लिए Chhattisgarh Udyog Sthal Chayan Niyam के तहत नए और सख्त ‘स्थल चयन मानदंड’ जारी किए हैं। नई व्यवस्था में लाल श्रेणी के भारी और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग अब आरक्षित वनों, रहवासी क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और हेरिटेज साइट्स की सीमा से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर ही शुरू किए जा सकेंगे।
नए आवेदनों के साथ विचाराधीन आवेदन भी नए नियमों के दायरे में
पर्यावरण मंडल ने साफ किया है कि नियम लागू होने की तारीख से ‘स्थापना हेतु सम्मति’ और ‘संचालन हेतु सम्मति’ के लिए मिलने वाले सभी नए आवेदनों की जांच संशोधित मानदंडों के आधार पर होगी। Chhattisgarh Udyog Sthal Chayan Niyam का दायरा यहीं तक सीमित नहीं है। जो आवेदन पहले से विचाराधीन हैं और जिन पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, उन्हें भी इन्हीं नए नियमों पर परखा जाएगा।
जानिए दूरी के नए नियम
सरकार के आदेश के अनुसार उद्योगों की प्रकृति और उनके प्रदूषण स्तर के आधार पर न्यूनतम दूरी के नए मानक तय किए गए हैं। राजस्व या वन रिकॉर्ड में दर्ज आरक्षित वन, रहवासी क्षेत्र, शिक्षण संस्थान और हेरिटेज साइट की सीमा से लाल श्रेणी के उद्योग कम से कम 500 मीटर दूर स्थापित किए जा सकेंगे। नारंगी श्रेणी के उद्योगों के लिए यह दूरी कम से कम 200 मीटर और हरी श्रेणी के उद्योगों के लिए कम से कम 100 मीटर रखी गई है।
लाल श्रेणी में कौन से उद्योग शामिल?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के आधार पर लाल श्रेणी में थर्मल पावर प्लांट, एकीकृत आयरन एंड स्टील, सीमेंट संयंत्र, डिस्टलरी और बड़े केमिकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले भारी उद्योग आते हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर (सिलतरा-उरला), कोरबा, रायगढ़ और दुर्ग (भिलाई) जैसे औद्योगिक जिलों में ऐसे उद्योगों की संख्या काफी ज्यादा है।
नारंगी और हरी श्रेणी के उद्योग कौन से हैं?
नारंगी श्रेणी में मध्यम प्रदूषण स्तर वाले उद्योग शामिल हैं, जैसे फूड प्रोसेसिंग, राइस मिल, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, छोटी इंजीनियरिंग यूनिट और स्टोन क्रशर। वहीं हरी श्रेणी में कम प्रदूषण या न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव वाले छोटे और पर्यावरण के अनुकूल उद्योग आते हैं।






