खरसिया नगर पालिका में टेंडर घोटाले का आरोप, नियम तोड़कर कराया गया निर्माण कार्य

रायगढ़/खरसिया। खरसिया नगर पालिका में आर्थिक अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों ने नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी किए बिना ही पसंदीदा ठेकेदार से काम करा लिया और काम पूरा होने के बाद निविदा (टेंडर) जारी की। यही नहीं, बजट 10 लाख से अधिक होने के बावजूद नियमों से बचने के लिए काम को दो हिस्सों में बांट दिया गया, ताकि मैन्युअल टेंडर प्रक्रिया के जरिए भुगतान हो सके।
इस पूरे मामले में भाजपा नेता और पूर्व एल्डरमैन विजय शर्मा ने सीधे नगर पालिका सीएमओ को शिकायत दी है। उन्होंने निविदा को रद्द करने और जांच की मांग की है।
मामला क्या है?
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका ने वार्ड नंबर 11 स्थित परशुराम चौक के पास चौपाटी निर्माण का प्रस्ताव पास किया था। यह काम 30 अगस्त को पूरा हो चुका है, जबकि निविदा प्रकाशन 28 अगस्त को किया गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 8 सितंबर और निविदा खोलने की तिथि 16 सितंबर रखी गई है।
इतना ही नहीं, चौपाटी निर्माण को भी दो भागों में बांटा गया—
म्यूरल आर्ट : 2.59 लाख
बाउंड्रीवॉल और गेट निर्माण : 8.96 लाख
दोनों ही काम मौके पर पहले ही पूरे हो चुके हैं और निरीक्षण भी नपा अध्यक्ष व सीएमओ द्वारा किया जा चुका है। आरोप है कि 10 लाख से ऊपर की निविदा ऑनलाइन होना अनिवार्य है, लेकिन नियम से बचने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटकर मैन्युअल टेंडर निकाले गए, ताकि भुगतान सीधे मनचाहे ठेकेदार को हो सके।
जमीन को लेकर भी सवाल
विजय शर्मा ने यह भी आरोप लगाया है कि चौपाटी निर्माण के लिए जिस जमीन का उपयोग किया गया है, वह लोक निर्माण विभाग (PWD) की है। खसरा नंबर 100, रकबा 8710 वर्गफुट भूमि पर नगर पालिका ने बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए निर्माण करा लिया। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18.02 लाख रुपये बताई जा रही है, जिसमें से 6.47 लाख का टेंडर पहले मई 2025 में निकाला गया था।
जांच की मांग तेज
मामला उजागर होने के बाद खरसिया नगर पालिका में हड़कंप मच गया है। शिकायत की जानकारी रायगढ़ कलेक्टर, एसडीएम खरसिया और नगरीय प्रशासन विभाग रायपुर को भी दे दी गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।












