Uncategorised

नगर पंचायत घरघोड़ा के टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक — नियम विरुद्ध निरस्तीकरण पर उठे सवाल

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

रायगढ़ । नगर पंचायत घरघोड़ा एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला अधोसंरचना एवं 15वें वित्त आयोग मद से जारी टेंडर निरस्तीकरण से जुड़ा है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत घरघोड़ा द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को निविदा आमंत्रण की सूचना जारी की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई थी। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आवेदक संतोष अग्रवाल ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने तर्क दिया कि नगर पंचायत ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पूर्व से आबंटित कार्यों को निरस्त कर दिया और बिना विधिवत प्रक्रिया के नई निविदा जारी कर दी।

बताया गया कि संतोष अग्रवाल को पूर्व में कई कार्य आवंटित किए गए थे, जिनमें से अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुके थे। इसके बावजूद नगर पंचायत ने भुगतान लंबित रखे और बाद में उन्हीं कार्यों के लिए नई निविदा सूचना जारी कर दी।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर पंचायत की सामान्य सभा की बैठक 19 अगस्त 2025 को हुई थी, जिसमें केवल कार्यों की समीक्षा का संकल्प लिया गया था, किंतु नियमों के विपरीत जाकर 4 सितंबर 2025 को कार्यों को निरस्त कर दिया गया। ठेकेदारों को नोटिस देकर जवाब भी लिया गया, लेकिन उसके बावजूद निरस्तीकरण कर दिया गया, जो कि नियम विरुद्ध माना गया।

मामले की सुनवाई करते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं माननीय न्यायाधीश बी. डी. गुरु की युगल पीठ ने टेंडर प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं तथा नगर पंचायत घरघोड़ा के मुख्य नगरपालिका अधिकारी को नोटिस जारी किया है।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button