महाराजा अग्रसेन जी की 5149वीं जयंती का भव्य आयोजन आज, बिल्हा में तैयारियाँ पूर्ण

बिलासपुर/बिल्हा । आगामी 22 सितंबर को युग पुरुष महाराजा अग्रसेन जी की 5149वीं जयंती का ऐतिहासिक आयोजन पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। पूरे भारत वर्ष में अग्र समाज के बंधु इस आयोजन की तैयारियों में एकता, समर्पण और उत्साह के साथ जुटे हुए हैं।
श्री अग्रसेन जयंती आयोजन समिति, बिल्हा (बिलासपुर) की अभिनव पहल पर विगत 7 सितंबर से सतत पूजा-अर्चना और विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। समिति द्वारा बिल्हा स्थित श्री अग्रसेन कन्या भवन में 22 सितंबर को भव्य जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें समाज के अनेक गणमान्यजन सम्मिलित होंगे।
मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि
इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि रायगढ़ शहर के लोकप्रिय व्यक्तित्व, उद्योगपति एवं वरिष्ठ समाजसेवी राकेश अग्रवाल (ए. आर. ग्रुप) को आमंत्रित किया गया है।
वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में रायगढ़ के मृदुभाषी, व्यवहारकुशल उद्योगपति एवं वरिष्ठ समाजसेवी प्रमोद अग्रवाल (रायगढ़ एंड जे. व्ही. जी. ग्रुप) को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया है। दोनों ही अतिथि अपने विचारों और उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाएंगे।
समाज को दिए संदेश
विशिष्ट अतिथि प्रमोद अग्रवाल ने अग्रसेन जयंती पर समाज को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “महाराजा अग्रसेन जी ने हमें सिखाया कि देश का विकास समाज के हर घर से शुरू होता है। जब हम संस्कार, समाज सेवा और आत्मविश्वास को जीवन में उतारते हैं, तभी वास्तविक प्रगति संभव है। उन्होंने सम्पूर्ण मानवता के लिए मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का मार्ग दिखाया और संयुक्त प्रयासों से स्थायी समृद्धि की प्रेरणा दी। आज हमें केवल बाहरी भव्यता नहीं, बल्कि नैतिक आचरण, त्याग और सेवा के गुणों को अपनाना होगा।”
मुख्य अतिथि राकेश अग्रवाल ने भी समाज को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “इस पावन अवसर पर हम सभी को महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनकी नीति ‘एक ईंट और एक रुपया’ यह बताती है कि जब हर व्यक्ति सहयोग के साथ खड़ा होता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है। अग्रसेन जी की संकल्पनाएँ हमें नैतिकता, अनुशासन और सेवा का सर्वोच्च पाठ पढ़ाती हैं। सादगी और न्याय में ही समाज की सुंदरता छिपी है और यही अग्रवाल समुदाय का मूल उद्देश्य होना चाहिए।”
आदर्शों से प्रेरणा
महाराजा अग्रसेन जी ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सामाजिक समरसता, आर्थिक समानता और सहयोग की भावना ही समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार है। उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और हमें न्याय, सौहार्द व नैतिकता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं।












