इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा। ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।
अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं। जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है। इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है। भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है। इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक में पीड़ितों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, धोखे या लालच के कारण किया गया पाया जाता है, तो उसे पीड़ित मानते हुए न्यायालय द्वारा क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल पीड़ित को न्याय मिलेगा, बल्कि ऐसे कृत्यों पर प्रभावी रोक भी लगेगी। जांच प्रक्रिया को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसमें केवल सक्षम अधिकारी ही मामलों की जांच करेंगे और न्यायालयों को इस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए अधिसूचित किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।
शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा, विवादों को कम करेगा और राज्य में एक संतुलित एवं शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है।
इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा। ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है। इसका भी प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा। मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा तथा विवादों को कम करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि स्पष्ट कानूनी व्यवस्था से अनावश्यक तनाव और संघर्ष की स्थिति से बचा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक पारंपरिक सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता को भी सुनिश्चित करेगा।