छत्तीसगढ़ में नई औद्योगिक संबंध संहिता लागू: पुराने श्रम कानून खत्म, अब विवादों का होगा डिजिटल समाधान

तीन पुराने नियमों की जगह लेगा नया प्रारूपछत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार, नया नियम लागू होते ही ‘छत्तीसगढ़ औद्योगिक विवाद नियम 1957’, ‘व्यावसायिक संघ विनियम 1961’ और ‘औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) नियम 1963’ पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएंगे। इन पुराने और जटिल नियमों के स्थान पर अब एक एकल और एकीकृत कानूनी ढांचा काम करेगा, जिससे उद्योगों और श्रमिकों के बीच कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता आएगी।
विवादों के निपटारे के लिए शिकायत निवारण समिति
नए प्रारूप के तहत, जिन औद्योगिक संस्थानों में 20 या उससे अधिक कामगार कार्यरत हैं, वहां ‘शिकायत निवारण समिति’ का गठन करना अनिवार्य होगा। इसके तहत श्रमिक विवाद उत्पन्न होने के एक वर्ष के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। कार्य समितियों में महिला कामगारों की संख्या के अनुपात में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य किया गया है। कार्य समितियों में सदस्यों की अधिकतम संख्या 20 निर्धारित की गई है।
30 दिनों में दावा-आपत्ति के बाद होगा लागू
भारत सरकार की औद्योगिक संबंध संहिता के अनुरूप, अब छत्तीसगढ़ में भी किसी भी औद्योगिक संस्थान में हड़ताल पर जाने से पहले कम से कम 14 दिन पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य अचानक होने वाली हड़तालों से उत्पादन में होने वाले नुकसान को रोकना और बातचीत के जरिए समाधान के अवसर प्रदान करना है।
डिजिटल होगा ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण
आधुनिकीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब ट्रेड यूनियनों (व्यावसायिक संघों) के पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। आवेदन से लेकर प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक की सुविधा डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, औद्योगिक विवादों से संबंधित समझौतों और अन्य विलेखों को भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
300 कर्मचारियों वाली इकाइयों के लिए नई शर्तें
केंद्रीय संहिता के प्रावधानों को अपनाते हुए अब 300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली औद्योगिक इकाइयों को छंटनी या इकाई बंद करने (क्लोजर) से पहले सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पहले यह सीमा केवल 100 कर्मचारियों तक सीमित थी।
30 दिनों में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां
श्रम विभाग ने इस प्रारूप को सार्वजनिक करते हुए आम जनता, श्रमिक संगठनों और उद्योगपतियों से 30 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। कोई भी पक्ष अपने सुझाव अवर सचिव, श्रम विभाग, महानदी भवन, नवा रायपुर को भेज सकता है। इन सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करेगी, जिसके साथ ही प्रदेश में नए श्रम युग की शुरुआत होगी।






