छत्तीसगढ़

मान्यता के बिना स्कूल संचालन, दूसरे UDISE कोड से परीक्षा कराने के आरोप से मचा हड़कंप

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डोंगरगढ़ में आदर्श पब्लिक स्कूल पर दूसरे स्कूल के UDISE कोड से विद्यार्थियों को पांचवीं बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने का आरोप लगा है। मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

UDISE Code Controversy: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम ढारा स्थित आदर्श पब्लिक स्कूल पर आरोप है कि उसने पांचवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों को शामिल कराने के लिए दूसरे स्कूल के UDISE कोड का उपयोग किया। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

दूसरे स्कूल के UDISE कोड के इस्तेमाल का आरोप

शिकायत के मुताबिक आदर्श पब्लिक स्कूल पिछले दो वर्षों से बिना वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहा है। आरोप है कि जब पांचवीं बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों का पंजीयन कराने की जरूरत पड़ी, तब स्कूल ने ग्राम ढारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के UDISE कोड 22090612802 का कथित तौर पर उपयोग कर बच्चों को परीक्षा में बैठा दिया।

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्कूल के पास खुद की मान्यता नहीं थी तो परीक्षा प्रक्रिया तक पहुंच कैसे मिली। सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन का दावा है कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी प्रकार की अनुमति दी थी। डोंगरगढ़ स्कूल विवाद सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है और अभिभावकों में चिंता का माहौल है।

अंकसूची में भी सामने आईं कई अनियमितताएं

शिकायत में यह भी कहा गया है कि विद्यार्थियों को जो अंकसूचियां जारी की गईं उनमें कई जरूरी जानकारियां गायब हैं। आरोप के अनुसार अंकसूचियों में न तो पेन नंबर दर्ज हैं, न APAAR ID का उल्लेख है और न ही संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर या सील मोहर मौजूद हैं। ऐसे में इन दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों में इस तरह की कमी बेहद गंभीर मानी जाती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि बच्चों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है। डोंगरगढ़ स्कूल विवाद ने अब विभागीय ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में

मामले में कार्रवाई में देरी से नाराज सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने इसकी शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव तक पहुंचाई है। प्राचार्य प्रकाश यादव ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताओं को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को जांच कर मंगलवार तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका और निगरानी प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

बच्चों के भविष्य और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं माना जा रहा बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यदि बिना मान्यता स्कूल चल रहे थे और दूसरे संस्थान के नाम पर परीक्षा प्रक्रिया पूरी की जा रही थी, तो यह विभागीय निगरानी की बड़ी चूक हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों की मान्यता, UDISE कोड और परीक्षा पंजीयन जैसी प्रक्रियाओं की नियमित जांच बेहद जरूरी है ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके। फिलहाल निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो डोंगरगढ़ स्कूल विवाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। अब सवाल यही है कि आखिर इतने समय तक यह कथित गड़बड़ी विभाग की नजरों से कैसे बची रही।

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