छत्तीसगढ़

PRSU में बड़ी लापरवाही: बीए की परीक्षा में बांट दिया बीबीए का प्रश्नपत्र, छात्रों में हड़कंप

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देशभर में परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी के बीच पं.रविशंकर शुक्ल विवि ने भी इसमें अपना योगदान दिया है। सोमवार को बीए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा थी।

रायपुर। देशभर में परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी के बीच पं.रविशंकर शुक्ल विवि ने भी इसमें अपना योगदान दिया है। सोमवार को बीए द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा थी। इसके अंतर्गत जेनेरिक इलेक्टिव विषय के पर्चे होने थे। कॉमर्स व बीबीए संकाय के अंतर्गत आने वाले बिजनेस इकोनॉमिक्स का चयन करने वाले छात्रों को मूल संकाय के छात्रों के लिए तैयार पर्चा ही बांट दिया गया, जबकि बीए के छात्रों के लिए पृथक पर्चा तैयार किया जाना था। गड़बड़ी यहीं नहीं रुकी।

 हिंदी माध्यम के छात्रों को भी इंग्लिश माध्यम में ही पर्चा थमा दिया गया। अर्थात रविवि हिंदी में प्रश्नपत्र छापना ही भूल गया। सबसे अधिक परेशान ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी हुए। वहां के प्राध्यापक प्रश्नपत्र का हिंदी अनुवाद करने लगे ताकि किसी तरह छात्रों को मदद पहुंचाई जा सके। लेकिन प्रश्नों के स्तर में ही भिन्नता होने के कारण विद्यार्थियों की समस्याएं समाप्त नहीं हो सकी। अंदरुनी सूत्रों के अनुसार, जब कई महाविद्यालय प्रबंधन ने रविवि से संपर्क किया तो उन पर बांटे गए प्रश्नपत्र को ही छात्रों से हल करवाने का दबाव बनाया गया।

यह है नियम 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थी अपने संकाय के इतर दूसरे संकाय से एक विषय का चुनाव कर सकते हैं। अपने संकाय से बाहर जाकर चुने गए विषय के अंक भी नतीजों में जुड़ते हैं। अंतिम परिणाम इसके आधार पर ही तय होते हैं। अपने संकाय से बाहर जाकर चुने गए विषय को जेनेरिक इलेक्टिव अर्थात जेई कहा जाता है। चूंकि छात्र केवल एक ही विषय दूसरे संकाय का पढ़ रहे होते हैं, ऐसे में उन्हें इस विषय की उतनी गहराई से समझ नहीं होती, जितनी उस संकाय के छात्रों को। इस कारण उच्च शिक्षा विभाग ने बीते दिनों विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए आदेश जारी कर कहा था कि वे जेनेरिक इलेक्टिव सब्जेक्ट के प्रश्नपत्रों की कठिनाई का स्तर अपेक्षाकृत कम रखें।

सूचना नहीं 
रविवि जनसंपर्क अधिकारी  प्रो. राजीव चौधरी ने बताया कि, परीक्षा केंद्रों से इस तरह की दिक्कतों के संदर्भ में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। छात्रहित हमारी प्राथमिकता है। इसके आधार पर ही निर्णय लेंगे।

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