
पर्यावरणीय स्वीकृति पर पुनर्विचार की मांग, ग्रामीणों ने पर्यावरण मंडल को सौंपा आपत्ति पत्र
रायगढ़। NTPC लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन के प्रस्तावित स्टेज-3 विस्तार को लेकर पुसौर क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को आपत्ति पत्र सौंपकर परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि NTPC के स्टेज-1 और स्टेज-2 के दौरान किए गए सामाजिक एवं पर्यावरणीय वादों का अब तक पूर्ण रूप से पालन नहीं हुआ है। ऐसे में नई विस्तार परियोजना को मंजूरी देने से पहले पुराने दायित्वों की समीक्षा की जानी चाहिए।
अस्पताल, शिक्षा और रोजगार के वादे पूरे नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संयंत्र स्थापना के समय NTPC द्वारा आधुनिक अस्पताल, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुविधाएं विकसित करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अपेक्षित स्तर पर इन सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि परियोजना के कारण क्षेत्र में महंगाई बढ़ी है, जबकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल सके हैं।
फ्लाई ऐश प्रदूषण से खेती और पर्यावरण प्रभावित होने का दावा
आवेदन में ग्रामीणों ने फ्लाई ऐश प्रदूषण को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा है कि संयंत्र से निकलने वाली राख का असर कृषि भूमि, जल स्रोतों और वायु गुणवत्ता पर पड़ा है। ग्रामीणों का दावा है कि हजारों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिससे किसानों की आजीविका पर असर पड़ा है।
16 जून को होगी जनसुनवाई, 4800 मेगावाट तक क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा NTPC लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के स्टेज-3 विस्तार के लिए 16 जून 2026 को जनसुनवाई निर्धारित की गई है। जनसुनवाई ग्राम महलोई स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप मैदान में आयोजित होगी।
प्रस्तावित विस्तार के तहत संयंत्र की वर्तमान 3200 मेगावाट क्षमता को बढ़ाकर 4800 मेगावाट किए जाने की योजना है। परियोजना का प्रभाव अरमुडा, छपोरा, बोडाझरिया, महलोई, रियापाली, कांडागढ़, देवलपुरा, घुटकूपाली, थेंगापाली और लारा सहित कई गांवों पर पड़ने की संभावना बताई गई है।
ग्रामीणों ने रखीं चार प्रमुख मांगें, नई स्वीकृतियों पर रोक की मांग
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें स्टेज-3 की पर्यावरणीय स्वीकृति पर पुनर्विचार, पूर्व चरणों में किए गए वादों और शर्तों की स्वतंत्र समीक्षा, स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों की निष्पक्ष जांच तथा पुराने सामाजिक एवं पर्यावरणीय दायित्वों के संतोषजनक पालन तक नई स्वीकृतियों को स्थगित रखने की मांग शामिल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मांगें क्षेत्र के लोगों तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। आवेदन की प्रतिलिपि रायगढ़ कलेक्टर को भी भेजी गई है।
रुंगटा संस की जनसुनवाई से पहले क्षेत्र में बढ़ी हलचल, व्यापक विरोध की चेतावनी
पुसौर क्षेत्र में 2 जुलाई को रुंगटा संस की विस्तार परियोजना की जनसुनवाई भी प्रस्तावित है। ग्रामीण पहले से ही विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के प्रभावों को लेकर चिंता जता रहे हैं। ऐसे में NTPC लारा के स्टेज-3 विस्तार को लेकर भी विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो 16 जून की जनसुनवाई में व्यापक विरोध देखने को मिल सकता है।







