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सांसद निधि के 1 करोड़ रुपए हड़पने के आरोप में ठेकेदार पर शिकंजा, 94 लाख जमा करने का आदेश

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रायगढ़। राज्यसभा सांसद निधि से स्वीकृत विकास कार्यों की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। करीब 1 करोड़ रुपए की राशि में हेराफेरी के आरोप में संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने ठेकेदार को करीब 94 लाख रुपए शासन के खाते में जमा करने का आदेश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर आरआरसी जारी करने और एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी गई है।

बिना काम किए निकाली गई रकम

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद K. T. S. Tulsi द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) से वर्ष 2020 से अप्रैल 2026 के बीच रायगढ़ जिले के लिए कई विकास कार्यों की अनुशंसा की गई थी।

इसी क्रम में कोसीर (सारंगढ़) स्थित फर्म महावीर ट्रेडर्स के संचालक नंदराम लहरे को एकताल, धनुआरडेरा और मिड़मिड़ा में सीसी रोड और सोलर स्ट्रीट लाइट के कुल 11 कार्य दिए गए। इन कार्यों की कुल लागत करीब 99 लाख रुपए थी, जिसका भुगतान भी हो चुका है।

जनपद पंचायत को बायपास कर निकाली राशि

नियमों के अनुसार, जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद फाइल जनपद पंचायत पुसौर भेजी जानी थी, जहां से वर्क ऑर्डर, प्लान और तकनीकी स्वीकृति के बाद कार्य शुरू होना था। आरोप है कि ठेकेदार ने सिस्टम में गड़बड़ी कर जनपद पंचायत को बायपास करते हुए सीधे राशि आहरित कर ली।

सबसे गंभीर बात यह रही कि राशि निकलने के बावजूद जमीन पर काम शुरू तक नहीं हुआ

जांच में गड़बड़ी प्रमाणित

शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होने पर ठेकेदार नंदराम लहरे को नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जवाब में ठेकेदार ने 15 दिनों के भीतर काम शुरू कर एक महीने में पूरा करने का आश्वासन दिया था।

हालांकि, दो महीने बीतने के बाद भी कोई काम शुरू नहीं हुआ और न ही पुसौर जनपद को इसकी कोई सूचना दी गई।

पहले भी घोटाले में आ चुका नाम

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2021 में पडिगांव में भी ठेकेदार का नाम इसी तरह की अनियमितताओं में सामने आया था। बताया जा रहा है कि इससे पहले मनरेगा में 3 करोड़ रुपए के घपले से भी उसका नाम जुड़ चुका है।

राशि जमा नहीं की तो होगी कड़ी कार्रवाई

अब कलेक्टर ने पुसौर जनपद सीईओ, संबंधित सरपंच और सचिव को निर्देश दिया है कि पोर्टल से इन कार्यों को निरस्त कर राशि शासन के खाते में जमा करवाई जाए।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में 94 लाख रुपए जमा नहीं किए गए, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ आरआरसी, रिकवरी और आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज करने सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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