Nano DAP Nano Urea : नैनो डीएपी और नैनो यूरिया से किसानों की लागत घटी, धान उत्पादन में मिले बेहतर परिणाम

रायगढ़ में किसानों को मिला नैनो उर्वरकों का लाभ
रायगढ़। खरीफ सीजन में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे नैनो डीएपी (Nano DAP) और नैनो यूरिया (Nano Urea) किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि इन उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत कम हुई है और फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।
किसान ने साझा किया अपना अनुभव
ग्राम उसरौट के किसान नरेश कुमार पटेल ने बताया कि उन्होंने ग्रीष्मकालीन धान की फसल में नैनो डीएपी का उपयोग किया। इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक डीएपी की आधी मात्रा डालने के बावजूद धान में अधिक कंसे, मजबूत तने और बेहतर वृद्धि देखने को मिली। वहीं नैनो यूरिया के इस्तेमाल से यूरिया पर होने वाला खर्च लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गया।
उर्वरक की कमी के बीच किसानों को मिली राहत
किसान नरेश कुमार पटेल ने बताया कि इस वर्ष पारंपरिक उर्वरकों की कमी के बावजूद सहकारी समितियों में Nano DAP और Nano Urea की उपलब्धता बनी रही। इससे किसानों को समय पर उर्वरक मिला और खेती प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार का आभार भी जताया।
कृषि विभाग दे रहा तकनीकी मार्गदर्शन
सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों की नियमित उपलब्धता के साथ-साथ इनके उपयोग की तकनीकी जानकारी भी दी जा रही है। किसानों को उत्पाद उपलब्ध होने की सूचना समय पर दी जाती है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
ऐसे करें नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो डीएपी का उपयोग धान के बीज उपचार के लिए किया जाता है। बुवाई से लगभग 30 मिनट पहले प्रति किलोग्राम बीज में 5 मिलीलीटर नैनो डीएपी मिलाकर उपचार करने से बेहतर अंकुरण और शुरुआती वृद्धि होती है।
वहीं धान की फसल 20 से 22 दिन की होने पर प्रति एकड़ एक बोतल नैनो यूरिया का छिड़काव करने से पारंपरिक यूरिया की आवश्यकता काफी कम हो जाती है। इससे प्रति एकड़ लगभग 25 से 30 किलोग्राम यूरिया की बचत संभव होती है और खेती की लागत घटती है।








