नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से तबाही, मृतकों की संख्या 1355 पहुंची

हजारों लोग अब भी लापता, मलबे और कीचड़ से लगातार बरामद हो रहे शव; सेना और सुरक्षा बलों का बचाव अभियान जारी
काठमांडू। नेपाल के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,355 हो गई है।
कई प्रांतों में भारी तबाही
प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर काठमांडू घाटी के अलावा बागमती, कोशी और गंडकी प्रांत के कई जिलों में देखने को मिला है। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के बाद राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में मलबा हटाने में जुटे हैं। इसी दौरान कीचड़ और मलबे में दबे लोगों के शव भी लगातार सामने आ रहे हैं।
करीब 5 हजार लोग अब भी लापता
आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने लापता लोगों की तलाश करना बड़ी चुनौती बनी हुई है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता लोगों की संख्या 4,996 बताई जा रही है। प्रभावित परिवार अपने परिजनों की तलाश में राहत एवं बचाव दलों से लगातार संपर्क कर रहे हैं।
सेना और पुलिस का संयुक्त बचाव अभियान
नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के हजारों जवान प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। मलबे में दबे लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी जारी है।
बढ़ती मौतों के बीच चुनौतीपूर्ण हालात
नदियों का जलस्तर कम होने के बाद कई इलाकों में राहत कार्यों में तेजी आई है, लेकिन बड़े पैमाने पर जमा मलबा और कीचड़ बचाव अभियान में मुश्किलें पैदा कर रहा है। प्रशासन का ध्यान अब लापता लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने पर केंद्रित है।






