रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर डॉक्टरों का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

बारिश के बीच 200 से अधिक डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन और पैदल मार्च, मांगें पूरी नहीं होने पर 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवा के बहिष्कार की चेतावनी
रायगढ़। मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में डॉक्टरों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। सीनियर रेजिडेंट, पीजी रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और एमबीबीएस डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के तहत जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया है।
शुक्रवार को तेज बारिश के बावजूद 200 से अधिक जूनियर डॉक्टर मेडिकल कॉलेज परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का कहना है कि शासन की ओर से उनकी 17 सूत्रीय मांगों में से केवल इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गई है, जबकि अन्य मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
बारिश के बीच डॉक्टरों ने निकाला पैदल मार्च
मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रदर्शन के बाद जूनियर डॉक्टर नारेबाजी करते हुए अंबेडकर चौक पहुंचे। यहां से डॉक्टरों ने पैदल मार्च शुरू किया और कलेक्ट्रेट पहुंचे। डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी 17 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर शासन स्तर पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एक महीने पहले शासन को सौंपा था ज्ञापन
जेडीए रायगढ़ के अध्यक्ष डॉ. विकास ने बताया कि डॉक्टरों ने करीब एक महीने पहले शासन को अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद शासन की ओर से इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गई, लेकिन अन्य मांगों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
डॉ. विकास के मुताबिक सभी मांगों पर निर्णय नहीं होने के कारण डॉक्टरों में नाराजगी है। इसी के चलते जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा का बहिष्कार कर आंदोलन शुरू किया है।
28 सितंबर से इमरजेंसी सेवा के बहिष्कार की चेतावनी
जेडीए अध्यक्ष ने कहा कि यदि डॉक्टरों की मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 28 सितंबर से इमरजेंसी सेवा का भी बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
डॉक्टरों ने प्रशासन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें पहुंचाते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई है। वहीं, आंदोलन के चलते अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।






