रायगढ़

रायपुर: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, कोर्ट ने 5 लाख रुपये प्रतिकर की अनुशंसा की

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खमतराई थाना क्षेत्र का मामला, प्रथम फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला

रायपुर। राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में प्रथम फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी मुनेंद्र ध्रुव को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता की शारीरिक और मानसिक क्षति तथा पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा भी की है।

मामले की सुनवाई प्रथम फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अच्छेलाल काछी ने की। पीड़िता की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर साहू ने अभियोजन पक्ष रखा।

घर से लापता होने के बाद थाने पहुंचा मामला

कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, 10 दिसंबर 2025 की शाम नाबालिग अपने घर से बिना बताए चली गई थी। परिवार के सदस्यों ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। इसके बाद 11 दिसंबर को उसकी मां ने खमतराई थाने में सूचना दी।

पुलिस ने गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शुरू की। 12 दिसंबर को नाबालिग अपनी मां के साथ थाने पहुंची, जिसके बाद पुलिस ने उसकी बरामदगी संबंधी कार्रवाई पूरी की। अगले दिन उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी पहले से जानता था नाबालिग को

अभियोजन के अनुसार, नाबालिग और आरोपी एक-दूसरे को पहले से जानते थे और दोनों के बीच बातचीत होती थी। कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी नाबालिग से प्रेम और शादी की बात कहता था, जिसके बाद दोनों के बीच मेलजोल बढ़ा।

अभियोजन के अनुसार, 10 दिसंबर की रात नाबालिग घर के पास स्थित नाश्ते की दुकान पर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे बुलाकर अपने घर ले गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था। अगले दिन तड़के आरोपी ने उसे घर जाने के लिए कहा। बाद में नाबालिग शाम के समय अपने घर पहुंची और उसकी मां उसे थाने लेकर गई।

मामले में कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार एक अन्य घटना का भी अभियोजन पक्ष ने उल्लेख किया, जिसमें अगस्त 2025 में आरोपी द्वारा नाबालिग को अपने घर ले जाने और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था।

बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा की मांग की

सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और मुकदमे का सामना किया। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र करीब 22 वर्ष होने, मजदूरी करने और पूर्व में किसी मामले में दोषसिद्ध नहीं होने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने का अनुरोध किया।

अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें तथा रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया और 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

पीड़िता के पुनर्वास के लिए 5 लाख रुपये प्रतिकर की अनुशंसा

अदालत ने पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक पीड़ा तथा घटना के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर से 5 लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा की है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता को पहले किसी स्तर पर अंतरिम क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है, तो उसे निर्धारित 5 लाख रुपये की राशि में समायोजित किया जाएगा।

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