रायगढ़

रायगढ़: अमलीडीह-छटोरिया मार्ग पर फ्लाई-ऐश डंपिंग के आरोप, ग्रामीणों ने जांच की मांग की

Advertisement

घने जंगल से लगी जमीन पर राख का भराव करने का दावा, आदिवासी किसानों की जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी उठे सवाल

रायगढ़। तहसील घरघोड़ा के ग्राम अमलीडीह में अमलीडीह-छटोरिया मार्ग के पास फ्लाई-ऐश डंपिंग और जमीन भराव को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में निजी और किसानों की जमीनों पर बड़े पैमाने पर फ्लाई-ऐश का इस्तेमाल किया जा रहा है। मामले को लेकर उन्होंने प्रशासन और पर्यावरण विभाग से स्थल निरीक्षण कर जांच कराने की मांग की है।

जंगल से लगी जमीन पर फ्लाई-ऐश का ढेर लगाने का आरोप

स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित क्षेत्र घने जंगल से लगा हुआ है और यहां जमीन पर फ्लाई-ऐश का बड़ा ढेर तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनों से जमीन की खुदाई कर गड्ढेनुमा स्थिति बनाई गई और इसके बाद समतलीकरण के नाम पर फ्लाई-ऐश डालकर जमीन को भरा जा रहा है।

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि इस तरह बड़े पैमाने पर फ्लाई-ऐश का भराव किया जा रहा है, तो इसका आसपास की जमीन और पर्यावरण पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

आदिवासी किसानों की जमीन को लेकर भी सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि एक जमीन पर अनुमति मिलने के बाद उसके आसपास स्थित अन्य जमीनों पर भी फ्लाई-ऐश डाले जाने का कथित सिलसिला शुरू हो गया है। इनमें कुछ जमीनें आदिवासी किसानों की बताई जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ किसानों को कथित तौर पर कम राशि देने का लालच देकर उनकी जमीन पर फ्लाई-ऐश का भराव कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले में जमीन के स्वामित्व, अनुमति और फ्लाई-ऐश परिवहन एवं डंपिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

प्रशासन और पर्यावरण विभाग से जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित स्थल का मौके पर निरीक्षण कराया जाए और यह जांच की जाए कि फ्लाई-ऐश के परिवहन, भंडारण और उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं। साथ ही किसानों की जमीन पर राख डालने की अनुमति, जमीन के उपयोग और पर्यावरणीय नियमों के पालन की भी जांच किए जाने की मांग उठाई गई है।

फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र अथवा प्रशासनिक स्तर से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फ्लाई-ऐश का उपयोग और डंपिंग निर्धारित नियमों एवं स्वीकृत अनुमति के अनुरूप हो रही है या नहीं।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button