छत्तीसगढ़

विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की हार पर CM विष्णुदेव साय का तंज, ओपी चौधरी बोले—‘आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए किया था’

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रायपुर। चार राज्यों में विधान परिषद चुनावों के नतीजों को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की कांग्रेस की मांग पर सवाल उठाए, वहीं वित्त मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए ही किया था।

CM साय बोले—बैलेट पेपर से भी नहीं खुला कांग्रेस का खाता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कांग्रेस बार-बार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी उसे हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनावी हार के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस अब अपनी पराजय के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी।

साय ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी विफलताओं के लिए मतदान प्रक्रिया को दोष देने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से, जीत के लिए जनता का विश्वास जरूरी है।

ओपी चौधरी का तंज—‘नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी शून्य’

प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने अपने बयान में कहा, “लगता है, आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कांग्रेस के लिए ही किया था। नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी शून्य।”

चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए हुए चुनावों में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। उन्होंने दावा किया कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को सफलता नहीं मिली।

ईवीएम और बैलेट पेपर की बहस पर भाजपा का हमला

वित्त मंत्री ने कहा कि चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से, परिणाम जनता के विश्वास से तय होते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर नेतृत्व की कमी, नकारात्मक राजनीति, परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

चौधरी के मुताबिक, कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए, न कि मतदान प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों के परिणाम भी कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय हैं।

चुनावी नतीजों के बहाने सियासी घमासान

विधान परिषद चुनावों के परिणामों के बाद मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के बयानों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भाजपा-कांग्रेस के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने चुनावी नतीजों को कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाने का आधार बनाया है।

चुनावी हार और जीत के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन लोकतंत्र में जनता का विश्वास हासिल करना ही हर राजनीतिक दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी रहती है।

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