रायगढ़ से कोरबा तक हाथियों का आतंक: 148 हाथी धरमजयगढ़ में सक्रिय, 40 किसानों की फसल को नुकसान

धान की तैयार फसल पर हाथियों के दलों की नजर, पसान में हाथी भगाने के दौरान घायल ग्रामीण की मौत; बंडामुंडा रेलखंड पर 24 हाथियों के कारण चार ट्रेनें प्रभावित
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और कोरबा जिलों में हाथियों की बढ़ती सक्रियता से ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। धरमजयगढ़ क्षेत्र में 148 हाथियों के अलग-अलग दल विचरण कर रहे हैं। वहीं कटघोरा वन मंडल के पसान और कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में हाथियों ने 20 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। धरमजयगढ़ में भी वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 20 किसानों की फसल प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, ओडिशा के बंडामुंडा रेलखंड में 24 जंगली हाथियों के झुंड के कारण चार यात्री ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ।
धरमजयगढ़ में 148 हाथियों की मौजूदगी, धान की फसल को नुकसान
धरमजयगढ़ क्षेत्र में विचरण कर रहे 148 हाथियों में 46 नर, 72 मादा और 30 शावक शामिल हैं। हाथियों के दल शाम होते ही भोजन की तलाश में गांवों और खेतों के आसपास पहुंच रहे हैं। इससे खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
वन विभाग के अनुसार, क्रोधा में 10 हाथियों के दल ने किसान रामो राठिया और किशन राठिया की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं आमापाली में 12 हाथियों के दल ने सोनाराम, महतू, राम चितरंजन, नर्मदा, मंगलू और श्रवण की फसल को क्षति पहुंचाई। कांसाबाहर, बोचिया और बेहरामार में भी एक-एक किसान की फसल प्रभावित हुई है।
नवाडीह भकुर्रा में हाथियों ने मिलन दुलार, सुकुरमती, कुंती, महेत्तर और लोभन की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए नुकसान का प्रकरण तैयार किया जा रहा है।
पसान में हाथी भगाने के दौरान घायल ग्रामीण की मौत
कटघोरा वन मंडल के पसान रेंज में 52 हाथियों का दल पिछले तीन दिनों से खोडरी क्षेत्र में विचरण कर रहा है। हाथियों के कारण आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। हाथी दिन में भी खेतों तक पहुंचकर धान की फसल खा रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
शुक्रवार को हाथियों को भगाने पहुंचे प्रताप सिंह गिरकर घायल हो गए थे। अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से रोकने के लिए टीम तैनात की गई है।
कटघोरा वन मंडल में कुल 56 हाथी बताए गए हैं। इनमें से 52 हाथी खोडरी क्षेत्र में हैं। पसान रेंजर मनीष सिंह के अनुसार, हाथियों की निगरानी के लिए दो टीमें लगाई गई हैं।
करतला में भी फसल बर्बाद, किसान चिंतित
कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में लबेद क्षेत्र में घूम रहे नौ हाथियों ने दूसरे दिन भी काशीपानी में धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। दोनों क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों के कारण किसानों को अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है।
धान की फसल पक चुकी है और दशहरा के बाद किसान कटाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे समय में हाथियों के बड़े दलों की आवाजाही ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आशंका है कि हाथियों का दल खेतों में घुसने पर एक ही रात में कई एकड़ की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
रायगढ़ की ओर से 32 हाथियों का दल पहुंचा
रविवार सुबह करीब छह बजे रायगढ़ जिले की ओर से 32 हाथियों का दल बारीकजोर जंगल स्थित हाथीबेड आरक्षित वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 902 और 903 में पहुंचा। इसके बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों में सतर्कता बरतने की सूचना दी।
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों को हाथियों के करीब जाने और उन्हें छेड़ने से रोकना है। विभाग की ओर से लोगों को सावधानी बरतने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
बंडामुंडा रेलखंड पर हाथियों ने रोकी ट्रेनों की रफ्तार
हाथियों की आवाजाही का असर रेल परिचालन पर भी पड़ा। चक्रधरपुर रेल मंडल के हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर बंडामुंडा रेलखंड में 24 जंगली हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। रविवार देर रात करीब दो बजे बंडामुंडा के ए केबिन और डी केबिन के बीच हुई इस घटना से रेल परिचालन बाधित हुआ।
हाथियों के झुंड के कारण धनबाद-एर्नाकुलम अलप्पुझा एक्सप्रेस, धनबाद स्पेशल, सूरत-मालदा एक्सप्रेस और शालीमार सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्रभावित हुईं। यात्रियों को ट्रेनों के संचालन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
फसल बचाने की चिंता, सतर्कता जरूरी
रायगढ़ और कोरबा क्षेत्र में धान की फसल कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में हाथियों के बड़े दलों की लगातार आवाजाही से किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। वन विभाग निगरानी और जागरूकता के प्रयास कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों से अपील है कि हाथियों को भगाने के लिए खुद उनके करीब न जाएं और किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।






