दशहरा पर मां काली की पूजा-अर्चना के साथ IPS अंकिता शर्मा ने निभाई पुलिस की शौर्य परंपरा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का दिया संदेश

शस्त्र पूजन भारतीय पुलिस की गौरवशाली विरासत का अभिन्न अंग, संघर्ष और आत्मविश्वास से युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं IPS अंकिता शर्मा
रायपुर। दशहरा पर्व भारतीय संस्कृति में शक्ति, साहस और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर पुलिस विभाग में शस्त्र पूजन और शक्ति स्वरूपा मां काली की पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। यह परंपरा पुलिस बल के शौर्य, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र एवं समाज की सुरक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। इसी परंपरा और महिला सशक्तीकरण के संदेश को जोड़कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी अंकिता शर्मा की भूमिका को प्रेरणादायक रूप में देखा जा रहा है।
शस्त्र पूजन पुलिस की ऐतिहासिक परंपरा
दशहरा के अवसर पर शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। पुलिस विभाग में यह परंपरा शस्त्रों के प्रति जिम्मेदारी, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और जनसुरक्षा के संकल्प को स्मरण कराने का माध्यम है। मां काली की आराधना शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के भाव को भी दर्शाती है।
पुलिस की इस परंपरा को किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत पहल तक सीमित करके देखने के बजाय विभाग की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संदर्भ में समझना आवश्यक है। पुलिसकर्मियों के लिए शौर्य का अर्थ केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कानून के प्रति निष्ठा, नागरिकों की सुरक्षा और कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना भी है।
संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल IPS अंकिता शर्मा
छत्तीसगढ़ की IPS अधिकारी अंकिता शर्मा की यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का विषय रही है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर अध्ययन, अनुशासन, धैर्य और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
एक IPS अधिकारी के रूप में जिम्मेदारियां केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहतीं। अपराध पर नियंत्रण, नागरिकों की सुरक्षा, संवेदनशील मामलों में उचित निर्णय लेना और आम लोगों के बीच विश्वास कायम करना भी पुलिस सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वर्दी में साहस, दिल में सेवा का जज्बा
पुलिस की वर्दी अपने साथ अधिकार ही नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती है। हर परिस्थिति में संयम बनाए रखना, निष्पक्षता के साथ निर्णय लेना और आम नागरिकों की समस्याओं को समझना एक पुलिस अधिकारी के कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
IPS अंकिता शर्मा की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए संदेश देती है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं। खासकर लड़कियों के लिए यह प्रेरणा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर वे प्रशासन और देश की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकती हैं।
शौर्य के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी
पुलिस सेवा में साहस के साथ संवेदनशीलता, अनुशासन के साथ मानवीय दृष्टिकोण और अधिकारों के साथ जवाबदेही भी जरूरी है। अपराध पर नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
दशहरा पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी कर्तव्य और जिम्मेदारी के इसी भाव की याद दिलाती है। शक्ति की आराधना का व्यापक संदेश यही है कि सामर्थ्य का उपयोग समाज की रक्षा, अन्याय के प्रतिरोध और जनकल्याण के लिए किया जाए।
परंपरा, कर्तव्य और महिला सशक्तीकरण का संदेश
दशहरा का पर्व जहां शक्ति और धर्म की विजय का संदेश देता है, वहीं पुलिस की शौर्य परंपरा कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के संकल्प को मजबूत करती है। IPS अंकिता शर्मा जैसी महिला अधिकारियों की उपलब्धियां यह भी रेखांकित करती हैं कि नेतृत्व, साहस और प्रशासनिक क्षमता किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं।
वर्दी में साहस, दिल में सेवा का जज्बा और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा—यही पुलिस सेवा की वास्तविक पहचान है। शस्त्र पूजन की परंपरा और महिला अधिकारियों की प्रेरक यात्राएं मिलकर समाज को यह संदेश देती हैं कि शक्ति का सर्वोत्तम रूप वही है, जिसका उपयोग जनसुरक्षा, न्याय और समाज की भलाई के लिए किया जाए।






