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रायगढ़ : चक्रधर समारोह के दूसरे दिन कथक, ओडिशी और लोकसंगीत ने बांधा समां

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रायगढ़ में जारी 40वें चक्रधर समारोह के दूसरे दिन कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंच पर कथक और ओडिशी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं लोकगायक सुनील मानिकपुरी की मधुर आवाज ने समां बाँध दिया।

🎶 कथक की शानदार प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम की शुरुआत रायगढ़ की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पूजा जैन और उनकी टीम ने पंचदेव वंदना से की। इसके बाद उन्होंने जयपुर घराने के तोड़े-टुकड़े, लखनऊ घराने का तराना और ठुमरी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ सौम्या साहू, पाव्या श्रीवास्तव, आसिता वर्मा और वंशिका पात्रा ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी।

इसके बाद रायगढ़ की राजनंदनी पटनायक और उनकी साथी पूनम गुप्ता ने ओडिशी नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।

बिलासपुर से आई प्रख्यात कथक नृत्यांगना प्रियंका सलूजा ने अपनी उत्कृष्ट भाव मुद्राओं और लयकारी से सभी का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।

🎤 लोकगायक ने मोहा मन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में लोकप्रिय लोकगायक सुनील मानिकपुरी ने अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने “हमर पारा तुहर पारा”, “गुईया रे गुईया रे” और “का जादू डरे” जैसे लोकगीतों के साथ कर्मा और शैला गीत प्रस्तुत कर पूरे पंडाल का माहौल संगीतमय बना दिया।

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