कटघोरा उपजेल की अनोखी पहल : कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू

कोरबा। जेल में बंद कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से कोरबा जिले के उपजेल कटघोरा में सराहनीय पहल की गई है। बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहां 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, ताकि जेल से रिहा होने के बाद वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें।
जेल की चारदीवारी में सीखा आत्मनिर्भरता का पाठ
आमतौर पर जेल में बंद होने के बाद कैदी खुद को समाज से अलग-थलग और असहाय महसूस करने लगते हैं। भविष्य को लेकर उनके मन में कई तरह की चिंताएं रहती हैं। इन्हीं आशंकाओं को दूर करने और सकारात्मक दिशा देने के लिए जेल प्रबंधन लगातार प्रयासरत है।
इसी कड़ी में State Bank of India RSETI (Rural Self Employment Training Institute) के सहयोग से कौशल विकास योजना के तहत यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
मशरूम उत्पादन से मार्केटिंग तक दी गई जानकारी
यह पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम जेल उपाधीक्षक सीमा उरांव की निगरानी में संपन्न हुआ। मुख्य प्रशिक्षक परमेश्वरी सिंह ने बंदियों को मशरूम उत्पादन की बारीकियां विस्तार से सिखाईं।
प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को:
- मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक
- रखरखाव और गुणवत्ता नियंत्रण
- बाजार में बिक्री (मार्केटिंग)
- मशरूम से अचार बनाने की विधि
जैसी उपयोगी जानकारियां दी गईं।
पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम
जेल प्रबंधन की इस पहल को बंदियों के पुनर्वास और आजीविका संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वर्तमान में जिला जेल और उपजेल में लगभग 400 बंदी निरुद्ध हैं, जिनमें अधिकांश विचाराधीन कैदी शामिल हैं।
नशा मुक्ति दिवस पर दिलाया गया संकल्प
मशरूम प्रशिक्षण के साथ-साथ उपजेल कटघोरा में International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking (अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस) भी मनाया गया।
यह कार्यक्रम District Legal Services Authority के सचिव डिम्पल भेड़िया के निर्देश पर आयोजित हुआ।
नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता
कार्यक्रम में बंदियों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें नशे से दूर रहकर जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई।
इसके बाद बंदियों ने नशा छोड़ने का सामूहिक संकल्प लिया।
न्यायिक अधिकारियों की रही उपस्थिति
अवसर पर अपर सत्र न्यायाधीश एच.के. रात्रे, तलवीर सिंह तथा जेल उपाधीक्षक सीमा उरांव सहित जेल स्टाफ मौजूद रहा।
कटघोरा उपजेल की यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और कौशल प्रशिक्षण के जरिए बंदियों को नई दिशा दी जा सकती है। इससे वे समाज में लौटकर सम्मानजनक जीवन जीने के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे।







