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प्रधानमंत्री मोदी ने खगोल विज्ञान ओलंपियाड में परंपरा और नवाचार के संगम पर दिया जोर

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी पर आयोजित 18वें अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड को संबोधित करते हुए भारत की वैज्ञानिक विरासत और आधुनिक उपलब्धियों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में 64 देशों से आए 300 से अधिक प्रतिभागियों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वह देश है, जहां परंपरा और नवाचार, आध्यात्म और विज्ञान, तथा जिज्ञासा और रचनात्मकता एक साथ चलते हैं।

उन्होंने 5वीं शताब्दी के गणितज्ञ व खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के योगदान को याद करते हुए बताया कि उन्होंने ‘शून्य’ की खोज की और सबसे पहले पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने का सिद्धांत प्रस्तुत किया। मोदी ने कहा, “वाकई, उन्होंने शून्य से शुरू किया और इतिहास रच दिया।”

प्रधानमंत्री ने भारत की आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने लद्दाख में 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची खगोलीय वेधशालाओं में से एक और पुणे के जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप का उल्लेख किया, जो पल्सर, क्वासर और आकाशगंगाओं के रहस्यों को सुलझाने में सहायक है।

उन्होंने बताया कि भारत स्क्वायर किलोमीटर ऐरे और एलआईजीओ-भारत जैसी वैश्विक मेगा-विज्ञान परियोजनाओं में सक्रिय योगदान दे रहा है। दो साल पहले चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा। साथ ही, आदित्य-एल1 सौर वेधशाला सूर्य की गतिविधियों की निगरानी कर रही है।

मोदी ने हाल ही में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के ऐतिहासिक मिशन की सफलता का भी उल्लेख किया और कहा कि यह सभी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण और युवाओं के लिए प्रेरणा है।

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