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एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, सरकार-कर्मचारियों के बीच टकराव तेज

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रायगढ़ । प्रदेशभर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16 हजार से अधिक कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। नियमितीकरण, संविलियन, ग्रेड पे, लंबित वेतन वृद्धि और सेवा संबंधी अन्य मुद्दों को लेकर कर्मचारी आंदोलनरत हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के कारण हड़ताल लगातार जारी है।

हड़ताल के चलते शासकीय अस्पतालों में प्रसव, पैथोलॉजी जांच, टीबी-मलेरिया जांच, ओपीडी, नवजात शिशु देखभाल, आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण पुनर्वास केंद्र और वृद्ध स्वास्थ्य जांच जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर है क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भी काम बंद कर चुके हैं, जिससे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हैं। गांवों में बीमार मरीजों को प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

रायगढ़ जिले में कुल 507 एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कटारिया ने सभी जिलों के सीएमएचओ को हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी करने और ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने की स्थिति में सेवा से पृथक करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सीएमएचओ रायगढ़ ने भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।

आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार केवल बयानों में मांगें मानने की बात कर रही है, जबकि अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है। उनकी प्रमुख मांगों में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में एक माह का चिकित्सीय अवकाश, वार्षिक सेवा वृद्धि, पारदर्शी टर्मिनेशन नीति, आपसी सहमति पर आधारित स्थानांतरण नीति, आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 लाख तक की चिकित्सा सुविधा और ग्रेड पे पर स्पष्ट लिखित नीति शामिल है।

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