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धान की अवैध खपत रोकने प्रशासन सख्त: खरीदी के दौरान ही हो रहा सत्यापन और मिलान

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 समितियों में धान की अवैध खपत को लेकर सख्त हुआ प्रशासन कई तरह से गड़बड़ियां पकड़ रहा है। पहले समितियों में जिस धान का सत्यापन और मिलान खरीदी के आखिरी दौर में शुरू किया जाता था, वहीं अब ये कार्रवाई खरीदी के दौरान की जा रही है। इससे केंद्रों में धान के अवैध डंप पकड़े जा रहे हैं।

प्रशासनिक कसावट के बीच हो रही धान खरीदी में नए प्रयोग किए गए हैं। इस बार उड़नदस्ता को मॉनिटरिंग टीम से मिल रही जानकारी पर कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है। जिस केंद्र में भी आंकड़ों में हेर-फेर नजर आता है टीम को तत्काल अलर्ट कर दिया जाता है। इसके बाद स्टेक का सत्यापन शुरू होता है। इस सत्यापन में केंद्र में ऑनलाइन दर्ज खरीदी से अधिक संग्रहण मिलने पर अतिरिक्त धान जब्त किया जा रहा है।

सैकड़ों क्विंटल का अवैध डंप बरामद

प्रशासन का संयुक्त दल केंद्रों में अचानक पहुंचकर मिलान की कार्रवाई कर रहा है। स्टेक की गणना में अब तक घुमका, तुमड़ीबोड़, पटेवा जैसी समितियों में सैकड़ों क्विंटल का अवैध डंप बरामद किया गया है। इस धान की कीमत भी लाखों में है। बड़ी बात यह है कि इस धान पर दावा करने कोई किसान भी सामने नहीं आ रहा है। इस प्रशासनिक कार्रवाई ने कोचियों की कमर तोड़ दी है। उनके पैंतरे हर जगह असफल साबित हो रहे हैं।

19248 क्विंटल धान पकड़ा जा चुका है

धान खरीदी पर प्रशासन की कड़ी निगरानी से जिले में अब तक 157 प्रकरण में 19248 क्विंटल धान पकड़ा जा चुका है। सबसे बड़ी खेप घुमका और तुमड़ीबोड़ के उपार्जन केंद्रों में पकड़ी गई। प्रशासन ने अब तक लगभग छह करोड़ रुपये का धान बरामद किया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरहदी जिले में कितने बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से समितियों में धान खपाया जा रहा था।

पुरानी रिपोर्ट पर मार्क किए संवेदनशील केंद्र

धान खरीदी से पहले कलेक्टर के निर्देश पर समितियों के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए थे। इसमें उन समितियों को मार्क किया गया जहां गड़बड़ियों की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। इन केंद्रों को विशेष तौर पर निगरानी के लिए रखा गया है। बताया जाता है कि 96 केंद्र में से 25 केंद्रों को इस सूची में रखा गया है। रियल टाइम मॉनिटरिंग भी की जा रही है, जिससे प्रबंधकों में भी डर बना हुआ है।

सैटेलाइट मैप से होगी जांच

इधर, घुमका में 79 एकड़ की गिरदावरी में गड़बड़ी के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस प्रकरण के लिए तीन साल के सैटेलाइट नक्शे से जांच की जाएगी। इस मामले में व्यापारी व किसान नवीन लुनिया के साथ ही गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने वाले पटवारी, प्राधिकृत अधिकारी, व्यापारी को धान उपलब्ध करवाने वाले कोचिये और संबंधित अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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