प्रदोष काल में शिव पूजा से मनोकामना पूर्ति

हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो महादेव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
वर्ष 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत अत्यंत खास माना जा रहा है। ज्योतिष और धार्मिक विश्वासों के अनुसार, इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय आने वाले वर्ष में भगवान शिव की कृपा बनाए रखने में लाभकारी साबित हो सकते हैं। माना जाता है कि जो जातक पूरे श्रद्धा भाव से इस व्रत का पालन करता है, उसे नए साल में आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है।
कब है साल का अंतिम प्रदोष व्रत?
साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत 17 दिसंबर, बुधवार को पड़ रहा है। इस दिन पूजा के लिए शुभ महूर्त शाम 05:27 बजे से रात 08:11 बजे (प्रदोष काल) तक रहेगा। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बुधवार का संबंध बुद्धि, व्यापार और विवेक से माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति चाहता है कि आने वाला नया साल 2026 उसके लिए शुभ और फलदायी रहे, तो उसे इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा और उपाय अवश्य करने चाहिए।
अंतिम प्रदोष व्रत पर करें ये शुभ उपाय
इस दिन भगवान शिव की पूजा पूरी विधि-विधान से करनी चाहिए। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में श्रद्धा भाव रखें। पूजा के समय तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें तिल मिलाएं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। ऐसा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं
इसके साथ ही बेलपत्र पर राम नाम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत के दिन पंचोपचार पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिसमें गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर आने वाला नया वर्ष अत्यंत शुभ होता है। भगवान शिव की कृपा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है, व्यापार में लाभ के योग बनते हैं और जीवन की अनेक समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही मानसिक तनाव कम होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
इस प्रकार, वर्ष 2025 के अंतिम प्रदोष व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाकर आप आने वाले साल को उज्ज्वल बना सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।












