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भारत–फ्रांस रक्षा साझेदारी: पिनाका से राफेल तक, कई बड़ी डील पर नजर



मुंबई/नई दिल्ली – भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron भारत दौरे पर हैं और प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे अहम क्षेत्रों में समझौतों की संभावना है।

इन चर्चाओं के बीच सबसे अहम खबर यह है कि फ्रांस भारतीय हथियार प्रणाली Pinaka मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर खरीदने पर विचार कर रहा है। यदि यह डील होती है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए ऐतिहासिक कदम होगा।

पिनाका क्यों है खास?

पिनाका भारत द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने स्वदेशी तकनीक से तैयार किया है।

इसका मुकाबला अमेरिकी M142 HIMARS और रूसी Tornado-S से माना जाता है।

प्रमुख विशेषताएं:

44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागने की क्षमता

मौजूदा रेंज: 75–90 किमी

पिनाका Mk-III: 120–130 किमी रेंज

Mk-IV पर कार्य जारी, संभावित रेंज 300 किमी

किफायती लागत और उच्च रैपिड-फायर क्षमता


अमेरिकी HIMARS जहां 45 सेकेंड में 6 रॉकेट दागता है, वहीं पिनाका दोगुनी फायरिंग क्षमता दिखाता है।

पिनाका ने कारगिल युद्ध में अपनी उपयोगिता साबित की थी और Armenia पहले ही इसे खरीद चुका है।




फ्रांस क्यों खरीदना चाहता है पिनाका?

फ्रांस की सेना के पास वर्तमान में M270 Multiple Launch Rocket System है, जो अब पुराना हो चुका है। फ्रांस नया सिस्टम विकसित कर रहा है, लेकिन उसके तैयार होने में समय लगेगा। ऐसे में तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए पिनाका एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प माना जा रहा है।

फ्रांसीसी सेना प्रमुख Pierre Schill ने 2025 में भारत यात्रा के दौरान पिनाका का परीक्षण भी किया था।




राफेल पर भी बड़ी डील संभव

भारत और फ्रांस के बीच 4.5+ पीढ़ी के 114 Dassault Rafale विमानों की संभावित डील पर भी चर्चा है। यह सौदा लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।

करीब 90 विमानों का निर्माण भारत में

50% तक स्वदेशी उपकरण

भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या (29 से लक्ष्य 42) को मजबूत करने में मदद





हैमर मिसाइल और जेट इंजन सहयोग

दोनों देश HAMMER missile के संयुक्त निर्माण पर भी विचार कर रहे हैं। यह मिसाइल राफेल विमानों में इस्तेमाल होती है।

भारत की Bharat Electronics Limited (BEL) और फ्रांस की Safran कंपनी के बीच संयुक्त उद्यम की संभावना है।

सफरान भारत के लिए 120kN क्षमता का जेट इंजन विकसित करने में सहयोग करेगा और हैदराबाद में M88 इंजन के लिए MRO सुविधा भी स्थापित कर रहा है।




पनडुब्बियों पर भी चर्चा

भारत और फ्रांस के बीच 3 अतिरिक्त Scorpene-class submarine पनडुब्बियों के निर्माण को लेकर भी बातचीत हो सकती है। इनका निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) में किया जा सकता है।




रणनीतिक महत्व

यदि पिनाका और राफेल जैसी डील्स अंतिम रूप लेती हैं, तो यह भारत को वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। फ्रांस जैसे विकसित और NATO सदस्य देश द्वारा भारतीय रक्षा प्रणाली पर भरोसा करना, “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के लिए बड़ा संकेत होगा।




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