इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: एआई से कृषि, स्वास्थ्य और तकनीकी क्षेत्र में नई संभावनाओं का आभास

नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर से आए विशेषज्ञों और तकनीकी लीडर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के नए प्रयोगों और इसके भविष्य पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने भारत सरकार का आभार जताया और कहा कि एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज में बड़े बदलाव की क्षमता रखता है।
समिट में एग्रीनकल्चर के सीईओ क्रिस्टोफ ओबे ने बताया कि उनकी कंपनी ने एआई-आधारित सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर विकसित किया है। इस ट्रैक्टर में चार कैमरे लगे हैं, जो फसल, किसानों और उपकरण की निगरानी करते हैं। ओबे ने कहा कि भारत में यह तकनीक महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक में पहले लागू की जाएगी। उनका कहना है कि एआई आधारित कृषि समाधान से किसानों को खेती में अधिक सटीक जानकारी और सुरक्षा मिल सकेगी।
वहीं, ओरिओल नेटवर्क्स के सीईओ जेम्स रेगन ने एआई कंप्यूटिंग की नई तकनीक का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने जीपीयू को लाइट के जरिए जोड़ने का तरीका विकसित किया है, जिससे कंप्यूटिंग की गति बढ़ेगी और बिजली की खपत कम होगी। उन्होंने भारत में एआई उत्साह की सराहना की और कहा कि देश अपनी तकनीकी क्षमता से वैश्विक एआई क्षेत्र में योगदान दे सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रभाव पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निदेशक एलेन लैब्रिक ने कहा कि एआई स्वास्थ्य कर्मियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनका सहयोग करेगा। एआई एक्स-रे और एमआरआई जैसी जांचों में असामान्यताओं को जल्दी पहचानकर गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने में मदद करेगा।
साइप्रस के मुख्य वैज्ञानिक डेमेट्रिस स्कोराइड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि यह समिट न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है और वैश्विक एआई सहयोग को बढ़ावा देगा।
समिट से साफ संदेश गया कि एआई कृषि, स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार में तेजी लाने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण बनकर उभर रहा है, और भारत इसके वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।





