छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बवाल: दुर्ग के जनपद CEO के बाद अब कांकेर में जनपद CEO पर दादागिरी के आरोप, कार्यालय में लंबा चला ड्रामा

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CG Sachiv Controversy: अंतागढ़ के जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर कार्यालय में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब ग्राम पंचायत बैजनपुरी के दर्जनों ग्रामीण पंचायत सचिव को हटाने की मांग लेकर पहुंचे।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव लंबे समय से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं और उनके कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। शिकायत सुनने के दौरान जनपद पंचायत सीईओ और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बन गई, जिसके बाद कार्यालय परिसर में काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। फोकस कीवर्ड बैजनपुरी सचिव विवाद को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

सचिव को हटाने की मांग लेकर पहुंचे ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत बैजनपुरी में पदस्थ सचिव श्रीमती अश्वनी ध्रुव पिछले करीब 15 वर्षों से वहीं कार्यरत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत से जुड़े कई काम समय पर नहीं होते और आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

इसी मुद्दे को लेकर करीब 50 ग्रामीण जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे सचिव के स्थानांतरण और कार्यों की जांच की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि पंचायत स्तर पर कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैजनपुरी सचिव विवाद को लेकर ग्रामीण लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

सीईओ और ग्रामीणों के बीच बढ़ा विवाद

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत सुनने के दौरान जनपद पंचायत सीईओ जी.एल. चुरेन्द्र ने उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी। ग्रामीणों का कहना है कि सीईओ सचिव का पक्ष लेते नजर आए, जिससे माहौल और अधिक गर्म हो गया।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्यालय के भीतर करीब 20 मिनट तक बहस चलती रही। हालांकि स्थिति बाद में सामान्य हो गई, लेकिन घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि पंचायत स्तर की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने से ऐसे विवाद सामने आते हैं।

कार्यशैली को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

ग्रामीणों ने दावा किया है कि जनपद सीईओ की कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। उनका कहना है कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम के क्षेत्रीय दौरे के दौरान भी संबंधित अधिकारियों के व्यवहार और कामकाज को लेकर शिकायत रखी गई थी।

हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास कार्यों में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं के कारण कई योजनाओं की गति प्रभावित होती है। हालांकि कमीशन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

स्थानीय जनता पर क्या पड़ सकता है असर

यह पूरा मामला केवल एक पंचायत सचिव या प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन पर पड़ सकता है। यदि ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होता, तो पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और संवाद की कमी ऐसे विवादों को जन्म देती है। फिलहाल ग्रामीण निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से मामले पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है। बैजनपुरी सचिव विवाद अब स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है।

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