राष्ट्रीय : जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियम होंगे सख्त, दो साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट की मंजूरी जरूरी

राज्यसभा से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित
नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन में लापरवाही करने वालों के लिए अब नियम और सख्त होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यसभा ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इससे पहले लोकसभा भी इस विधेयक को पारित कर चुकी है।
देरी से रजिस्ट्रेशन पर बदले नियम
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करना है, ताकि देरी से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाया जा सके।
एक साल से अधिक देरी पर बढ़ेगी जांच
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिन के भीतर कराना होता है। 21 दिन से एक साल तक देरी होने पर विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण कराया जा सकता है।
अब यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक साल से अधिक और दो साल के भीतर कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति और सत्यापन जरूरी होगा।
दो साल बाद कोर्ट का आदेश अनिवार्य
यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो साल से अधिक समय बीत चुका है, तो अब पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश लेना अनिवार्य होगा। सक्षम अधिकारी आवेदन में दी गई जानकारी की प्रमाणिकता की जांच के बाद ही अनुमति देंगे।
जन्म प्रमाण पत्र का बढ़ा महत्व
सरकार का कहना है कि वर्ष 2023 के संशोधन के बाद जन्म प्रमाण पत्र को जन्म तिथि और जन्म स्थान का प्रमुख दस्तावेज बनाया गया है। इसका उपयोग स्कूल प्रवेश, वोटर सूची, पासपोर्ट, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस और सरकारी नौकरी सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है।
फर्जी प्रमाण पत्र रोकने के लिए कदम
सरकार का तर्क है कि जन्म प्रमाण पत्र की बढ़ती उपयोगिता के कारण फर्जी दस्तावेज बनाने की संभावना भी बढ़ी है। इसी को देखते हुए पुराने मामलों में अतिरिक्त जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अनिवार्य किया जा रहा है।







