रक्षाबंधन 28 अगस्त को, भद्रा का साया नहीं; सुबह 5.57 से 9.48 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्

अभिजीत मुहूर्त में भी बांध सकेंगे राखी, अपराह्न में 1.52 से 4.35 बजे तक रहेगा शुभ समय
रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करेंगी, वहीं भाई बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार देंगे।
भद्रा से राहत, दिनभर बांध सकेंगे राखी
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार भद्रा 27 अगस्त को सुबह 9.08 बजे से रात 9.32 बजे तक रहेगी और इसके बाद समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 28 अगस्त को बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
आचार्य पं. संदीप तिवारी के अनुसार हिंदू पंचांग में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9.08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9.48 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
सुबह 5.57 से 9.48 बजे तक मुख्य शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का मुख्य शुभ समय सुबह 5.57 बजे से 9.48 बजे तक बताया गया है। इसकी कुल अवधि 3 घंटे 51 मिनट रहेगी। इस दौरान पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.56 से दोपहर 12.48 बजे तक रहेगा। वहीं अपराह्न मुहूर्त दोपहर 1.52 से शाम 4.35 बजे तक राखी बांधने के लिए शुभ माना गया है।
हालांकि, सुबह 10.46 से दोपहर 12.22 बजे तक राहुकाल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
पूजा के बाद भगवान को अर्पित करें राखी
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बहनें सुबह अपने इष्ट देवी-देवताओं की पूजा कर उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद भगवान को अर्पित की गई राखी भाई की कलाई पर बांधी जा सकती है। पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में मंत्रोच्चारण के साथ रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है।
प्रेम और विश्वास का पर्व है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक है। बदलते दौर में भी इस पर्व की भावनात्मक अहमियत कायम है।
पढ़ाई, नौकरी और व्यवसाय के कारण कई भाई-बहन अलग-अलग शहरों में रहते हैं। ऐसे में ऑनलाइन राखी भेजने से लेकर वीडियो कॉल के जरिए तिलक, आरती और शुभकामनाएं देने तक, पर्व मनाने के तरीके भी बदल रहे हैं। बाजारों में पारंपरिक राखियों के साथ हस्तनिर्मित, पर्यावरण अनुकूल और व्यक्तिगत संदेश वाली राखियों की मांग भी बढ़ी है।
रक्षाबंधन के प्रमुख मुहूर्त एक नजर में
- रक्षाबंधन: 28 अगस्त, शुक्रवार
- मुख्य राखी बांधने का समय: सुबह 5.57 से 9.48 बजे तक
- मुख्य मुहूर्त की अवधि: 3 घंटे 51 मिनट
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11.56 से दोपहर 12.48 बजे तक
- अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 1.52 से शाम 4.35 बजे तक
- भद्रा: 27 अगस्त, सुबह 9.08 से रात 9.32 बजे तक
- राहुकाल: सुबह 10.46 से दोपहर 12.22 बजे तक
- 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव: नहीं रहेगा
पौराणिक कथाओं में भी मिलता है रक्षासूत्र का उल्लेख
रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भविष्य पुराण के अनुसार, असुरों के राजा बलि के साथ युद्ध के समय इंद्र की पत्नी शची ने इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था।
वहीं महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। इसी भाव को भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के संकल्प से जोड़कर देखा जाता है।
इस वर्ष भद्रा रहित रक्षाबंधन होने से पर्व को लेकर बहनों में खास उत्साह है। परिवारों में पूजा, राखी, मिठाई और उपहारों की तैयारियां शुरू हो गई हैं।






