32 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला: ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत फरार आरोपी प्रकाश मिश्रा गिरफ्तार

फर्जी बिल-वाउचर के जरिए ट्रांसपोर्ट कंपनी से भुगतान कराने का आरोप, सह आरोपी पहले ही हो चुका है गिरफ्तार
रायगढ़। ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत कोतवाली पुलिस ने ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सह आरोपी दीपक शर्मा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर अलग-अलग वाहनों के नाम पर भुगतान कराया और रकम को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर कराया। मामले में पुलिस पहले ही दीपक शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज चुकी है।
पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच न्यायालय में किया आत्मसमर्पण
पुलिस के अनुसार प्रकाश मिश्रा निवासी सोनुमुड़ा देवारपारा, रायगढ़ पर गिरफ्तारी का दबाव बढ़ रहा था। इसी बीच उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। न्यायालय की अनुमति के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर विधिवत कार्रवाई की और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
एक ही वाउचर नंबर पर तैयार किए गए डुप्लीकेट बिल
पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत 24 मार्च 2026 को हुई, जब श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक रायगढ़ के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे।
भुगतान प्रक्रिया के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आने के बाद कंपनी स्तर पर जांच शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक जांच में सितंबर 2025 से कथित फर्जीवाड़ा किए जाने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि आरोपियों ने एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार किए और उनके आधार पर कंपनी से भुगतान कराया।
अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हुई रकम
पुलिस जांच के अनुसार कथित फर्जीवाड़े में संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इन खातों के माध्यम से कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की राशि निकाली गई।
शिकायत के आधार पर कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 187/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) और 60 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
आरटीओ जांच में कई वाहन नंबर निकले संदिग्ध
विवेचना के दौरान पुलिस ने कंपनी की ओर से प्रस्तुत बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया। पुलिस के अनुसार सत्यापन में कई वाहन नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के पाए गए।
जांच में इन वाहनों का श्रीराम ट्रांसपोर्ट अथवा माल परिवहन के काम से कोई संबंध नहीं मिला। पुलिस ने संबंधित वाहन मालिकों से भी पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक वाहन मालिकों ने बताया कि उन्होंने कभी श्रीराम ट्रांसपोर्ट के लिए कोई परिवहन कार्य नहीं किया था। इसके बाद पुलिस को फर्जी बिल-वाउचर के जरिए कंपनी से भुगतान हासिल किए जाने की आशंका और मजबूत हुई।
दीपक शर्मा की गिरफ्तारी के बाद सामने आई जानकारी
फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस द्वारा ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत लगातार दबिश दी जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को सह आरोपी दीपक शर्मा के अपने मोहल्ले में देखे जाने की सूचना मिली। सूचना के आधार पर कोतवाली पुलिस की टीम ने 29 जुलाई 2026 को दरोगापारा क्षेत्र में दबिश देकर उसे हिरासत में लिया था।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में दीपक शर्मा ने प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और अलग-अलग वाहनों के नंबरों का इस्तेमाल कर कंपनी से भुगतान कराने की जानकारी दी।
कमीशन काटकर रकम बताए गए खातों में भेजने का आरोप
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में दीपक शर्मा ने बताया कि जिन लोगों के बैंक खातों में रकम भेजी जाती थी, वे अपना कमीशन काटने के बाद बची राशि प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर वापस ट्रांसफर कर देते थे।
पुलिस के अनुसार दीपक शर्मा ने कथित 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी में से करीब 15 लाख रुपये स्वयं रखने तथा लगभग 16 से 17 लाख रुपये प्रकाश मिश्रा को दिए जाने की जानकारी दी थी। इन बयानों और बैंक लेनदेन से जुड़े तथ्यों का पुलिस द्वारा सत्यापन किया जा रहा है।
बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच जारी
प्रकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया। अब पुलिस मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, क्यूआर कोड और अन्य वित्तीय माध्यमों की जांच कर रही है।
इसके साथ ही पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले में सामने आए बैंक खातों और लेनदेन से जुड़े लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात पुलिस ने कही है।






