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साइबर जागृति अभियान: स्कूलों और छात्रावासों में पहुंची रायगढ़ पुलिस, विद्यार्थियों को किया जागरूक

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OTP, UPI PIN से लेकर डिजिटल अरेस्ट और QR कोड फ्रॉड तक साइबर ठगी के तरीकों की दी जानकारी

रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से शुरू किए गए “साइबर जागृति अभियान” को रायगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी के मार्गदर्शन में जिलेभर में व्यापक रूप दिया है। अभियान के पहले सप्ताह में स्कूलों और छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

सोमवार को पुलिस टीमों ने विभिन्न स्कूलों एवं छात्रावासों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। इस दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, ऑनलाइन ठगी से बचाव और साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई।

पुसौर के स्कूलों में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम

थाना पुसौर एवं साइबर टीम द्वारा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पुसौर, अभिनव स्कूल पुसौर एवं आदर्श विद्यालय पुसौर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया और ऑनलाइन लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की समझाइश दी।

वहीं थाना कोतवाली क्षेत्र के नटवर स्कूल में कोतवाली पुलिस की टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए।

छात्रावास में छात्राओं से डीएसपी उन्नति ठाकुर ने किया संवाद

पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास रायगढ़ में छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान डीएसपी श्रीमती उन्नति ठाकुर ने छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए साइबर अपराध के बदलते तरीकों और उनसे बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।

उन्होंने छात्राओं को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय अपनी निजी जानकारी, फोटो और अन्य संवेदनशील विवरण अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी।

OTP से UPI PIN तक, गोपनीय जानकारी साझा न करने की समझाइश

पुलिस टीमों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से समझाया कि OTP, PIN, CVV, ATM/डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक पासवर्ड और UPI PIN जैसी संवेदनशील जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

पुलिस ने बताया कि साइबर ठग कई बार बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि या किसी परिचित व्यक्ति के नाम से संपर्क कर गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसी भी कॉल, मैसेज या लिंक पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए।

KYC से डिजिटल अरेस्ट तक, ठगी के नए तरीकों से कराया परिचित

जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान पुलिस ने विद्यार्थियों को KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने, लोन, नौकरी, ऑनलाइन खरीदारी, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग तथा QR कोड/UPI फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि साइबर ठग अलग-अलग बहाने बनाकर लोगों को डराने, लालच देने या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था से आधिकारिक माध्यम से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का दिया संदेश

रायगढ़ पुलिस ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें और सोशल मीडिया पर मिलने वाले अज्ञात लोगों के अनुरोधों को स्वीकार करने से बचें। साथ ही ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने और किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल पुलिस या संबंधित साइबर सहायता माध्यम से संपर्क करने की समझाइश दी गई।

“साइबर जागृति अभियान” के माध्यम से रायगढ़ पुलिस का उद्देश्य विद्यार्थियों और आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सजग बनाना तथा सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के लिए जागरूक करना है।

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