छत्तीसगढ़

Udanti-Sitanadi Tiger Reserve: 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुला उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, जंगल सफारी का बढ़ा रोमांच

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मानसून के बाद खुले जंगल के द्वार, वन्यजीवों के साथ प्राकृतिक सुंदरता देखने पहुंच रहे पर्यटक; तेज बहाव के कारण फिलहाल बोटिंग-कायाकिंग बंद

मैनपुर। प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व मानसून के बाद 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया है। रिजर्व के गेट खुलते ही प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

घने जंगल, पहाड़, नदियां और झरनों से घिरा यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, भालू सहित कई वन्यजीवों के साथ विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी देखे जा सकते हैं। हॉर्नबिल यहां पाए जाने वाले प्रमुख पक्षियों में शामिल है।

वन्यजीवों के साथ प्राकृतिक नजारों का आकर्षण

मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए टाइगर रिजर्व को कुछ समय के लिए पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था। अब 1 अक्टूबर से प्रवेश शुरू होने के बाद जंगल सफारी के लिए पर्यटकों में उत्साह देखा जा रहा है।

वन विभाग की ओर से पर्यटकों के लिए जिप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जंगल भ्रमण के दौरान वन क्षेत्र की हरियाली, पहाड़ी इलाकों और प्राकृतिक वातावरण के साथ वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलता है।

उदंती-सीतानदी क्षेत्र में कुल्हाड़ीघाट की नदियों और सोंढुर बांध में कायाकिंग तथा बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। हालांकि, बारिश के बाद नदियों में तेज बहाव को देखते हुए फिलहाल सुरक्षा कारणों से वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां रोक दी गई हैं।

बोटिंग और कायाकिंग के लिए करना होगा इंतजार

तेज जल प्रवाह के कारण पर्यटकों को बोटिंग और कायाकिंग का आनंद लेने के लिए अभी करीब दो महीने इंतजार करना पड़ सकता है। जलस्तर और बहाव सामान्य होने के बाद ही इन गतिविधियों को दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।

बारिश के मौसम में क्षेत्र के झरने और नदियां भी अपने पूरे उफान पर रहती हैं। प्राकृतिक सौंदर्य देखने पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, लेकिन तेज बहाव वाले जलस्रोतों के कारण सावधानी भी जरूरी है।

कई जलप्रपात और वनभैंसा संरक्षण केंद्र आकर्षण

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुलाप जलप्रपात, कारीपगार, शेषपगार, देवधारा, बोतलधारा और बनियाधस सहित कई प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा राजकीय पशु वनभैंसा के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ा केंद्र भी यहां मौजूद है।

वनभैंसा कभी इस क्षेत्र की प्रमुख पहचान रहा है। वर्तमान में यहां एक वनभैंसा होने की जानकारी दी गई है, जिसके संरक्षण पर वन विभाग का ध्यान है।

अन्य पर्यटन स्थलों के खुलने का करना होगा इंतजार

भारी बारिश के कारण बस्तर संभाग के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, पामेड़ और भैरमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अभी पर्यटकों के लिए बंद बताए गए हैं। इनके आगामी महीने में खुलने की संभावना है।

इसी तरह रायपुर संभाग के बलौदाबाजार जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य और दुर्ग संभाग के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव अभयारण्य भी निर्धारित समय के अनुसार बाद में पर्यटकों के लिए खोले जाएंगे।

जलप्रपातों के भ्रमण में सावधानी की अपील

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बंद रखा जाता है। अब 1 अक्टूबर से इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

उन्होंने पर्यटकों से जलप्रपातों और नदी-नालों के आसपास भ्रमण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। तेज बहाव वाले जलस्रोतों के करीब जाने से बचने और वन विभाग द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया है।

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