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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: विभागीय कर्मचारियों को BVSc पाठ्यक्रम में प्रवेश का अधिकार नहीं, चार याचिकाएं खारिज

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बिलासपुर, 29 जून 2026। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पशुधन विकास विभाग के सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों की चार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। ये याचिकाएं BVSc & AH (बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री) पाठ्यक्रम में विभागीय अभ्यर्थी के रूप में प्रवेश देने की मांग को लेकर दायर की गई थीं।

“केवल पदोन्नति की संभावना से प्रवेश का अधिकार नहीं”

न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि केवल पदोन्नति की संभावना के आधार पर किसी भी कर्मचारी को प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश का कानूनी अधिकार नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि यदि मौजूदा प्रवेश नियमों में विभागीय अभ्यर्थियों के लिए कोई आरक्षण या अलग कोटा निर्धारित नहीं है, तो न्यायालय ऐसा कोई प्रावधान बनाने का निर्देश नहीं दे सकता।

2025-26 प्रवेश नियमों के अनुसार फैसला

अदालत ने पाया कि वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया Admission Rules-2025 के तहत संचालित की जा रही है। इन नियमों में पशुधन विभाग के इन-सर्विस कर्मचारियों के लिए न तो कोई आरक्षण है और न ही अलग से कोटा निर्धारित किया गया है।

इसी आधार पर अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में विभागीय उम्मीदवार के रूप में प्रवेश देने का कोई वैधानिक आधार मौजूद नहीं है।

पुराने फैसले का लाभ नहीं मिलेगा

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि यह डिग्री उनके पदोन्नति के लिए आवश्यक है और पहले भी हाईकोर्ट द्वारा ऐसे मामलों में राहत दी गई थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह निर्णय विशेष परिस्थितियों में दिया गया था और उसे नजीर नहीं माना जा सकता।

अनुच्छेद 14 का हवाला भी अस्वीकार

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उपयोग उस लाभ के लिए नहीं किया जा सकता, जो वर्तमान कानून, नियम या सरकारी नीति में उपलब्ध ही नहीं है।

सभी याचिकाएं निराधार मानकर खारिज

इन सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने चारों याचिकाओं को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।

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