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राज्य में दो वर्षों से लंबित घोटाले: जांच एजेंसियों की रफ्तार पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

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पिछले दो वर्षों से राज्य में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो-भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करोड़ों रुपए के कई बहुचर्चित घोटालों की जांच कर रही हैं। शराब घोटाला, कोल लेवी (कोयला परिवहन), डीएमएफ फंड दुरुपयोग, कस्टम मिलिंग, महादेव सट्टा एप, नान घोटाला, एनजीओ घोटाला, सीजीपीएससी और सीजीएमएससी में दवा व उपकरण खरीदी जैसे मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

इन सभी घोटालों से जुड़े करीब 50 आरोपी फिलहाल रायपुर जेल में बंद हैं, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री का पुत्र और कई पूर्व एवं वर्तमान आईएएस अधिकारी शामिल हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 3,200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले की धीमी जांच पर सख्त रुख अपनाते हुए ईडी और ईओडब्ल्यू-एसीबी को 90 दिनों के भीतर अंतिम आरोपपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में 2022 से 2023 के बीच 411 करोड़ रुपए का सीजीएमएससी घोटाला सामने आया था। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा सहित छह आरोपी रायपुर जेल में बंद हैं। इनमें सीजीएमएससी के अधिकारी बसंत कौशिक, क्षिरोद राउतिया, कमलकांत पटनवार, डॉ. अनिल परसाई और दीपक कुमार बंधे शामिल हैं। शशांक के पिता शांतिलाल और साले शुभम बारमेटा सहित कई अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

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